20 साल से अपनी माँ को करा रहे चार धाम की यात्रा:श्रवण कुमार

आगरा। श्रवण कुमार की कहानी से आप वाकिफ होंगे। लेकिन आपको श्रवण कुमार से मिलने का मौका मिले तो…। 2 फरवरी 1996 को मध्यप्रदेश के जबलपुर से अपनी मां को डोली पर लेकर पैदल निकले कैलाश गिरी कलयुग के श्रवण कुमार हैं। वह 20 साल से अपनी अंधी मां कीर्ति देवी को चार धाम की यात्रा करा रहे हैं।

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कलयुग के श्रवण कुमार

कलयुग के श्रवण कुमार कैलाश की कहानी दिल को छू लेने वाली है। बचपन में कैलाश पेड़ से गिर गए थे। हालात इतनी बिगड़ गई कि उन्हें बचाना मुश्किल हो गया। कैलाश मां ने मन्नत मांगी कि बेटा बच जाए तो चार धाम की पैदल यात्रा करेंगे। ईश्वर ने उनकी सुन ली और कैलाश फिर से उठ खड़े हुए।

अब बारी थी मां का वचन पूरा करने की। कैलाश बड़े हुए मां के उस वचन को पूरा करने की ठान ली। दुनिया के रंग न देख पाने वाली मां को इस बेटे ने डोली में बैठाया और पैदल चार धाम की यात्रा पर लेकर चल पड़ा।

कैलाश और उनकी मां की पैदल यात्रा नर्मदा परिक्रमा से शुरू हुई। इसके बाद काशी, अयोध्या, इलाहाबाद, चित्रकूट, रामेश्वरम, तिरुपति बालाजी, जगन्नाथ पूरी, गंगा सागर, तारा पीठ, बैजनाथ धाम, जनकपुर, नेमसारांड, बद्री नाथ, केदार नाथ, ऋषिकेश, हरिद्वार, पुष्कर, द्वारिका, नामेश्वर, सोमनाथ, जूनागढ़, महा कालेश्वर, ॐ कालेश्वर, मईहर, बांदकपुर, आगरा होते हुए वृन्दावन के बाद जबलपुर अंतिम पड़ाव होगा।

कैलाश का एक और सपना है। वह जबलपुर में हास्पिटल और गौशाला खोलकर इंसान और जानवर की सेवा करना चाहते हैं। मंगलवार को कैलाश अपनी 92 साल की मां को लेकर आगरा पहुंचे तो यहां उनका जोरदार स्वागत किया गया।

कैलाश अपनी मां को लेकर 36,865 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर चुके हैं। आगरा में बाबा को ताजमहल देखने की इच्छा है। इसलिए बाबा रात में भी यहां के सेवला इलाके में ही रुकेंगे। भाजपा नेता गोविन्द चाहर एवं भूप सिंह बाबा को ताजमहल के दर्शन कराएंगे।

कैलाश 20 साल से चार धाम की यात्रा पर हैं। वह अपनी मां को लेकर रोजाना कम से कम पांच किलोमीटर चलते हैं। यात्रा शुरू करने से पहले महज 400 रुपए लेकर निकले कलयुग के श्रवण कुमार को देखकर लोग मन से दुआएं देते हैं।

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