लड़ाकू विमानों को नहीं ढूंढ पाएंगे दुश्‍मन के रडार:आविष्‍कार

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बरकतउल्ला विश्‍वविद्यालय (बीयू) के छात्र एक ऐसे पदार्थ की खोज की है जो रडार की पकड़ में नहीं आएगा। खास बात यह है कि अगर इस पदार्थ का लेप लड़ाकू विमानों पर लगा दिया जाए तो दुश्‍मन के जहाज उसे पकड़ नहीं पाएंगे।

इस पदार्थ की खोज करने वाले छात्र हिलाल अहमद रेशी विश्‍वविद्यालय के फिजिक्‍स विभाग में शोध करता है। उसने बताया कि उसने ऑक्साइड नैनो मटेरियल की खोज की है। इस मटेरियल की क्षमता की वैज्ञानिक पुष्टि नई दिल्ली स्थित नेशनल फिजिक्स लेबोरेटरी ने की है।

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छात्र का आविष्‍कार, लड़ाकू विमानों को नहीं ढूंढ पाएंगे दुश्‍मन के रडार

हिलाल ने बताया कि उन्होंने आठ साल की मेहनत के बाद इस मटेरियल को तैयार किया है। इस काम में उन्हें सीनियर साइंटिफिक ऑफिसर डॉ. विलास शेलके का सहयोग मिला।

रेशी के अनुसार अभी विमानों को राडार से बचाने के लिए कार्बन या मेटल से बना मटेरियल उपयोग किया जा रहा है। यह पहली बार है जब किसी ने ऑक्साइड से नैनो मटेरियल बनाया है। नेशनल फिजिक्स लेबोरेटरी और डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट आर्गेनाइजेशन जैसे संस्थान कार्बन और मेटल पर ही काम कर रहे हैं।

सीनियर साइंटिफिक ऑफिसर डॉ. विलास शेलक ने बताया, ‘सेना और एयर लाइंस में प्रचलित राडार में माइक्रोवेव किरणों का उपयोग होता है। यह किरणें किसी सतह से टकराकर वापस आती हैं और डिटेक्टर की ओर से संग्रहित होकर वस्तु की इमेज स्क्रीन पर बना देती है। लेकिन यदि कोई सतह इन किरणों को परावर्तित होने से रोक दे तो राडार इसे पकड़ नहीं पाते हैं। विभाग ने जो मटेरियल बनाया है, उसकी लेयर की मोटाई को बढ़ा़ने का रिजल्ट 99 प्रतिशत रहा है।’

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