प्राकृतिक सुंदरता के रोमांच से भरपूर हैं भारत की ये 10 अनदेखी जगहें!

भारत ऐसी भौगोलिक, सांस्कृतिक और धार्मिक विविधताओं के साथ-साथ पौराणिक कथाओं वाला एक विशाल देश है, जहां हर जगह पर एक कहानी है. इसके कोने-कोने में एक कहानी होती है. भारत के हर कोने के आस-पास खोज करने के लिए पुराने किले, तैरने के लिए झरने और एक से बढ़ कर एक व्ंयजन खाने के लिए छोटे से ढाबे में भी मिल सकते हैं.

अगर आप कुछ देखना चाहते हैं या पता लगाना चाहते हैं, तो जल में डूबे हुए मंदिरों से लेकर अज्ञात गुफाओं जैसी बहुत सी ऐसी जगहें हैं, जिन्हें आप एक्सप्लोर कर सकते हैं. आइये जानते हैं कि अभी भी हमारे भारत में ऐसे बहुत से स्थान हैं, जो अपने आप में कई राज़ समेटे हैं.

1. तैरने वाला गिरिजाघर, शेट्टीहल्ली, कर्नाटक

अगर आपको खंडहर और रहस्यमयी जगहें अपनी ओर आकर्षित करती हैं, तो दक्षिणी कर्नाटक के बंगलुरू के पास हासन से 13 किलोमीटर की दूरी पर स्थित शेट्टीहल्ली एक महत्त्वपूर्ण डेस्टिनेशन हैं, जिसे आपको अवश्य देखना चाहिए. ये स्थान अपने विशेष चर्च के लिए जाना जाता है, जिसका निर्माण 1860 में फ्रेंच मिशनरीज ने करवाया था. हेमवती नदी के बैकवॉटर के किनारे बने इस चर्च की खासियत ये है कि मॉनसून के दौरान ये नदी के पानी में डूब जाता है.

यह रेतीले किनारे पर स्थित है. यह वास्तुकला का ही कमाल है कि छतों के ढह जाने के बाद इतनी जर्जर स्थिति में भी खड़ा है. दोपहर की धूप में इसे देखना अत्यंत मनोरम लगता है.

2. जंगल में स्थित मंदिर, गोरसोप्पा , कर्नाटक

जैसा कि नाम से ही पता चलता है कि यह मंदिर जंगल में स्थित है. कर्नाटक के गोरसोप्पा क्षेत्र के घने जंगल में स्थित ये मंदिरों का समूह है. इस अविश्वसनीय, अतुलनीय और हैरान कर देने वाली जगह पर मंगलोर से तीन घंटे की यात्रा के बाद पहुंचा जा सकता है. इन मंदिरों का निर्माण होयसल शैली में किया गया है. 13वीं सदी में जैन धर्मावलंबियों द्वारा इन मंदिरों को शानदार पत्थरों और चट्टानों से तराश कर बनाया गया है. गंतव्य स्थल होने के कारण अब वहां पर मंदिरों के आस-पास कुछ दुकानें खुल गई हैं. यह अब घूमने के लिए बेहतरीन जगहों में से एक है.

3. मन्नार की खाड़ी, तमिलनाडु

तमिलनाडु के शहर रामेश्वरम के नजदीक एक छोटे से मछली पकड़ने वाले समुद्री तट पर एक शानदार खाड़ी है. इस सुंदर समुद्री तट की जानकारी काफ़ी कम लोगों को होने के कारण यह भीड़-मुक्त स्थल है. यह जैविक विविधता के लिहाज से पर्यटन हेतु बेहतर जगह है. एकदम साफ, सफेद रेत और नीले पानी में दिखने वाली ये खाड़ी समुद्री कछुए, व्हेल और हजारों प्रवासी पक्षियों का निवास स्थल है.

4. टेराकोटा मंदिर, विष्णुपुर, पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल में हरी-भरी घासों के बीच लाल रंग के इन टेराकोटा के मंदिरों का निर्माण 17वीं और 18वीं सदी में किया गया था. ये मंदिर न सिर्फ़ एक सुंदर धरोहर हैं, बल्कि इनका इतिहास भी काफ़ी पवित्र है. विष्णुपुर का ये मंदिर भगवान कृष्ण और राधा को समर्पित है. इन मंदिरों को गंगा नदी डेल्टा की जलोढ़ मिट्टी से बनाया गया है. इनकी संरचनाओं पर बेहतरीन नर्तकों और प्रकृति से संबंधित चित्रों की चित्रकारी की गई है.

5. लॉन्ग आईसलैंड, अंडमान और निकोबार

यह द्वीप-समूह काफ़ी रहस्यमयी है. यहां आने वाला हर यात्री स्वर्ग सा अनुभव प्राप्त करता है. यह लॉन्ग आईसलैंड औरों से ज़्यादा कुछ अलग नहीं है, बल्कि सफेद रेतीले समुद्री तट और नीले पानी के साथ यह बेहतर और बेताज स्वर्ग की तरह लगता है. यह आईसलैंड पोर्ट ब्लेयर से 125 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. इसका घना सदाबहार जंगल और समुद्री जीवन इसे घूमने की सबसे बेहतरीन गंतव्य स्थल बनाने के लिए काफ़ी है.

6. हवेली, चुरू, राजस्थान

राजस्थान के पास एक समृद्ध विरासत रही है, जो अपने शाही महल और रियासतों के लिए मशहूर है. चुरू राजस्थान राज्य में स्थित है. यह स्थान ऐतिहासिक दृष्‍टि से काफी महत्वपूर्ण है. यह जगह प्रमुख रूप से हवेली, मंदिर और किलों के लिए जानी जाती है. जयपुर से सिर्फ़ 200 किलोमीटर की दूरी पर चुरू की आश्चर्य चकित करने वाली हवेलियां हैं, जो वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण है. आंगन वाले घरों के साथ चुरू की हवेलियां काफी़ पुरानी है. जिसमें अंकित तारीख से पता चलता है कि 1830 के दशक की हैं. इसे ग्रैंड हवा महल के नाम से भी जाना जाता है, जिसमें 1,111 दरवाजे और खिड़कियों के साथ-साथ चमकीले रंगों से रंगी कई दीवारें हैं. यह देखने में काफ़ी भव्य है.

7. नरारा मरीन नेशनल पार्क, गुजरात

यह भारत में अपनी तरह का इकलौता राष्ट्रीय पार्क और जैव विविधता वाला क्षेत्र है, जिसका आपने पहले कभी शायद ही अनुभव किया हो. यह वास्तव में देखने योग्य है. दरअसल, जामनगर जिले में हवाई अड्डे से 7 किलोमीटर दूर कच्छ की खाड़ी के दक्षिणी तट पर स्थित यह मरीन नेशनल पार्क भारत का पहला समुद्री अभयारण्य है. वर्ष 1982 में स्थापित यह गुजरात के वन विभाग द्वारा संचालित है और इसमें लगभग 42 द्वीप शामिल हैं, जिनमें बहुत से प्रवाल–शैलमाला से घिरे हैं. यह समुद्री जीव-जंतुओं के जीवन के लिए एक बेहतर समुद्री पार्क है. यह सुंदर लेकिन नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र है, जहां आप पानी के नीचे दुर्लभ और रंगीन जीवों से भरा एक मनोरम जंगल पाएंगे.

8. सिजु गुफा, मेघालय

मेघालय की यह गुफा भारत की पहली नैचुरल लाइमस्टोन गुफा है. यहां पर एक बहुत कमजोर पुल भी है, जो 2 पहाड़ियों को जोड़ता है. इस पर पैर तो रखकर देखिए, यह जिस तरह हिलेगा, आपकी रूह तक कांप जाएगी. यह शिलॉन्ग से 8.5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. इस गुफा में चमगादड़ों का निवास होने के कारण इसे चमगादड़ों की गुफा भी कहा जाता है. भारत की तीसरी सबसे लंबी यह गुफा भूमिगत पानी के लिए भी जानी जाती है. यह बिच्छू, सांप और अन्य कीड़े-मकोड़ों का घर भी है.

9. पूस मेला, शांतिनिकेतन, पश्चिम बंगाल

शांतिनिकेतन पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के अंतर्गत बोलपुर के समीप एक छोटा सा शहर है. नोबेल पुरस्कार विजेता कवि रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा विश्वभारती विश्वविद्यालय की स्थापना के कारण यह नगर प्रसिद्ध हो गया. 1921 में राष्ट्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा पाने वाले विश्वभारती में इस समय लगभग छह हजार छात्र पढ़ते हैं. इसी के इर्द-गिर्द शांतिनिकेतन बसा था. इसे कलाओं का शहर भी कहा जाता है. यहां पर लगने वाला शांतिनिकेतन का पूस का मेला सबसे ज़्यादा आकर्षण का केंद्र होता है. इस मेले में परंपरागत हस्तशिल्प की झलक देखने को मिलती है. पूस मेला दिसम्बर महीने के अंत में हर साल होता है.

10. बागेश्वर, उत्तराखंड

Source: himvan

सरयू और गोमती नदी के संगम पर बसा बागेश्वर एक धार्मिक शहर है. ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव एक बार इस क्षेत्र में बाघ का भेष धर कर आए थे. हिन्दू पौराणिक कथाओं में भी इस शहर का वर्णन मिलता है. कौसानी से 28 किमी दूर स्थित यह शहर हर साल बड़ी संख्या में सैलानियों को आकर्षित करता है. यह शहर दो ओर से भीलेश्वर और नीलेश्वर पहाड़ से घिरा हुआ है. उत्तरायनी मेले का आयोजन यहां हर साल किया जाता है.

Source: natgeotraveller.in

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