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जानिये आमों के नामकरण की दिलचस्प कहानी!

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बाज़ार में किसी चीज़ को देखने पर शायद की उतनी खुशी होती होगी, जितनी मौसम के पहले आम को देखने पर होती है. देश का राष्ट्रीय फल और हर किसी के फ्रिज में अपनी जगह गर्मी भर बनाए रखता है. देश में जितनी तरह की भाषा बोली जाती है, शायद उससे ज़्यादा किस्म के आम पैदा होते हैं. वो चाहे दशहरी हो या सफेदा, बड़े से बड़े ईमानदार की नीयत भी इनके आगे डोल ही जाती है. पर क्या आपको पता है कि इन आम के नाम कैसे पड़े? नहीं, तो कोई बात नहीं हम बताते हैं.

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Source- Thebetterindia

1. अलफांसो आम

Source- Agaremangoes

ये आम मुख्य रूप से महाराष्ट्र, गोवा, गुजरात के साथ-साथ तमिलनाडु, कर्नाटक केरल के कुछ भागों में पाया जाता है. इसका ये नाम पुर्तगाली जनरल और सैन्य विशेषज्ञ Afonso de Albuquerque के नाम पर पड़ा. Afonso ने भारत में पुर्तगाली कालोनियां स्थापित करने में मदद की थी. आम की ये किस्म पुर्तगाली लोगों ने ईज़ाद की थी.

2. दशहरी आम

Source- Wikimedia

18वीं शताब्दी में दशहरी आम सबसे पहले लखनऊ के नवाब के बगीचे में निकला था. उत्तर प्रदेश के काकोरी के पास दशहरी गांव के लोगों ने दावा किया कि आम का वो पौधा उनके आम के पेड़ से निकला था. इसी के साथ उस आम का नाम उस गांव के नाम पर पड़ गया. देश में सबसे ज़्यादा दशहरी आम मलिहाबाद, उत्तर प्रदेश में पाया जाता है. ये मुख्य रूप से उत्तर भारत, नेपाल और पाकिस्तान में पाया जाता है.

3. लंगड़ा आम

Source- Hangouts

देव नगरी बनारस अपने मंदिरों के बाद किसी चीज़ के लिए जानी जाती है तो वो है लंगड़ा आम. सभी आमों के नामकरण में से सबसे रोचक कहानी लंगड़े आम की है. लगभग 250 साल पहले बनारस के एक मंदिर में एक साधु पहुंचा. साधु ने पुजारी से वहां रहने की आज्ञा मांगी. साधु साथ में दो आम के पौधे लाया था जिसे उसने मंदिर परिसर में ही बो दिया. लगभग चार साल साधु और पुजारी ने मिल कर उसकी सिंचाई की. चार साल बाद साधु मंदिर छोड़ कर चला गया और पुजारी को आम के पेड़ की देख-रेख के लिए छोड़ गया. साधु ने पुजारी को उस आम को सिर्फ़ प्रसाद के रूप में इस्तेमाल करने को कहा और पूरा आम न देने की हिदायत दी. पूरा आम पा कर लोग उसकी गुठली पा जाते और खुद के पेड़ लगा लेते. पुजारी ने कई सालों तक यही किया और आम की लोकप्रियता पूरी शहर में फैल गई. बाद में काशी नरेश के कहने पर पुजारी ने वो आम राजा को दे दिए, जिसके बाद हर जगह उस आम की खेती होने लगी. वह पुजारी लंगड़ा था और वहीं से इस आम का नाम लंगड़ा आम पड़ गया. ये आम उत्तर भारत, बांग्लादेश और पाकिस्तान में पाया जाता है.

4. चौंसा आम

Source- Trekearth

इस आम का उत्पादन मुख्य रूप से मीरपुर खास सिंध, मुल्तान, पाकिस्तान और साहीवाल पंजाब में होता है. इस आम का नाम शेरशाह सूरी ने रखा. शेरशाह ने हुमायूं को चौसा में हराया और उसके बाद अपने पसंदीदा आम का नाम चौसा रख दिया.

5. केसर आम

Source- Blogspot

ये आम गुजरात के गिरनार पहाड़ों के पास पैदा होता है. ये आम पहली बार 1931 में जूनागढ़ वज़ीर साले भाई द्वारा वनथली में उगाया गया था. इसका नाम केसर आम 1934 में पड़ा, जब जूनागढ़ के नवाब मोहम्मद महाबत खान III ने इसे खाते वक्त इसका नारंगी गूदा देख कर कहा कि ‘ये तो केसर है’.

6. तोतापरी आम

Source- Magnificientmaharastra

तोतापरी आम अधिकतर दक्षिण भारत में पैदा होता है. इसे बैंग्लोरा, Kallamai, Kili Mooku, Gilli, Mukku, Sandersha, Thevadiyamuthi और Ginimoothi Maavina Kayi के नाम से भी जाना जाता है. उत्तर भारत में यह तोतापरी के नाम से भी प्रसिद्ध है. माना जाता है कि इसका ये नाम इसका आकार तोतापरी बकरी के मुंह की तरह होने की वजह से पड़ा. फ्लोरिडा में आम की दो फसलें Anderson और Brooks इसी से बनी हैं.

7. बंगनपल्ली आम

Source- Pitara

Banganapalle आंध्र प्रदेश के एक शहर का नाम है, जो अपने आम की लिए मशहूर है. ये कुरनूल जिले में पड़ता है, इस आम का नाम इसी शहर पर पड़ा. इसे सफेदा आम के नाम से भी जाना जाता है.

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