GST: राज्य सभा में पास, 2017 में लागू होने से पहले पूरी करनी होगी ये लंबी प्रक्रिया

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बुधवार को राज्य सभा में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) विधेयक पारित होना अप्रत्यक्ष कर (इनडायरेक्ट टैक्स) सुधार के दिशा में ये एक निर्णायक कदम है। ये विधेयक साल 2010 से ही सदन में लंबित था। राज्य सभा में पारित होने के बाद ये विधेयक दोबारा लोक सभा में पेश किया जाएगा ताकि ऊपरी सदन द्वारा किए गए संशोधनों पर लोक सभा की सहमति ली जा सके। मूल विधेयक लोक सभा में मई 2015 में पारित हुआ था। लोक सभा में पारित होने के बाद जीएसटी विधेयक को कम से कम 15 राज्य विधान सभाओं में पारित होना होगा। उसके बाद विधेयक को राष्ट्रपति के मंजूरी की जरूरत होगी ताकि यह विधेयक एक अप्रैल 2017 की समय सीमा के अंदर प्रभावी हो सके।

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राष्ट्रपति से मंजूरी मिलने के बाद 60 दिनों के अंदर राज्यों और केंद्र के प्रतिनिधियों के जीएसटी काउंसिल का गठन करना होगा। जीएसटी काउंसिल टैक्स की दरों के साथ ही वस्तु एवं सेवा की दरों का बैंड का निर्धारण करेगा। राज्य पहले से ही टैक्स दरों के लेकर आमराय बनाने की प्रक्रिया में हैं। माना जा रहा है कि उत्पादित वस्तुओं पर टैक्स घटेगा और सेवाओं पर बढ़ेगा। राज्यों के वित्त मंत्रियों की एमपावर्ड कमिटी टैक्स की दरें तय करने के लिए दिशा-निर्देश तय कर रही है।

जीएसटी विधेयक एक संविधान संशोधन विधेयक है इसलिए इसके बाद एक लंबी विधायी प्रक्रिया पूरी करनी होती है। टैक्स दरों में बदलाव के लिए मोटे तौर पर तीन कानूनों में बदलाव करना होगा। संसद को सेंट्रल जीएसटी (सीजीएसटी) और इंटिग्रेटेड जीएसटी (आईजीएसटी) विधेयक को पारित करना होगा। वहीं 29 राज्यों को अपनी-अपनी विधान सभाओं में स्टेट जीएसटी (एसजीएसटी) विधेयक पारित करना होगा।

संभावना है कि राज्य केंद्रीय सीजीएसटी की तर्ज पर अपने जीएसटी कानून बनाएंगे ताकि नई टैक्स दरों को लागू किया जा सके। इसके अलावा नए टैक्स के लिए इलेक्ट्रानिक जीएसटी नेटवर्क (जीएसटीएन) बनाया जाएगा, जिसमें ऑनलाइन पंजीकरण, टैक्स भुगतान और रिटर्न फाइलिंग की सुविधा होगी।

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जीएसटीएन को मार्च 2013 में सेक्शन 25 (गैर-लाभकारी) के तहत एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के तौर पर बनाया गया। इसमें सभी राज्यों और केंद्र के टैक्स देने वालों के डाटा को आपस में जोड़ा जाएगा ताकि अप्रत्यक्ष करों को बगैर किसी मुश्किल के लागू किया जा सके। आईटी सेक्टर की अग्रणी कंपनी इंफोसिस को पिछले साल 1380 करोड़ रुपये में जीएसटीएन के निर्माण का ठेका दिया गया। कंपनी इसके चालू होने के पांच सालों तक इसकी देखभाल भी करेगी।

सभी करदाताओं को उनके पैन कार्ड से जुड़ा 13/15 अंकों का एक आइडेंटिफिकेशन नंबर दिया जाएगा। इससे जीएसटी पैन लिंक्ड सिस्टम की शुरुआत होगी। इस सुविधा से आयकर डाटा के आदान-प्रदान और करदाताओं की शिकायतों के भुगतान में मदद मिलेगी। पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के अनुसार “इस विधेयक का दिल इसकी टैक्स की दर है” और अप्रत्यक्ष कर होने के नाते इसे “जितना संभव हो उतना कम” होना चाहिए।

मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रामण्यम की अध्यक्षता में बनी एक समिती ने 15-15.5 प्रतिशत का रेवेन्यू न्यूट्रेल रेट और मानक 17-18 प्रतिशत जीएसटी रेट रखने का सुझाव दिया है। वहीं दिल्ली स्थिति थिंक टैंक एनआईपीएफपी ने 26 प्रतिशत दर का सुझाव दिया है। जीएसटी काउंसिल जीएसटी कानून के मसौदे, आपूर्ति कानून, छूट की सीमा, थ्रेशहोल्ड लिमिट, राज्यों और केंद्र के साझा प्रशासकीय सीमा पर विचार करेगा। इसके अलावा राज्यों के वित्त मंत्रियों
के एमपावर्ड कमिटी द्वारा भुगतान प्रक्रिया, पंजीकरण, रिफंड प्रक्रिया और जीएसटी के तहत रिटर्न के लिए बनाए गई ज्वाइंट कमिटी की रिपोर्ट पर भी विचार करेगा। इस रिपोर्ट पर जनता भी राय दे सकती है।

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बीएमआर एंड एसोशिएट के इनडायरेक्ट टैक्स के लीडर राजीव दिमरी के अनुसार, “इन सारी प्रक्रियाओं के पूरे होने करना होगा साथ ही उद्योग जगत की संस्थाओं को भी इनमें शामिल करना होगा। जीएसटी को एक अप्रैल 2017 तक लागू करन के लिए इन सभी प्रक्रियाओं को एक साथ समयबद्ध तरीके से पूरा करना होगा।”

हालांकि टैक्स विशेषज्ञों ने जीएसटी के आईटी नेटर्वक को प्रभावी तौर पर लागू करने को लेकर आशंका जताई है, खासकर छोटे उत्पादकों के लिए। हालांकि विशेषज्ञों का ये भी मानना है कि नए टैक्स से आम आदमी की क्रय शक्ति बढ़ेगी। माना जा रहा है कि नए जीएसटी के तहत उत्पादों की कीमत 27 से 20 प्रतिशत तक कम हो सकता है।

विशेषज्ञों ने सेवा कर बढ़ने से आम आदमी की मुश्किलें बढ़ने की आशंका को बेबुनियाद बताया है। केपीएमजी इंडिया के इनडायरेक्ट टैक्स के प्रमुख सचिन मेनन के अनुसार, “सर्विस सेक्टर के जीएसटी की दर 15 से 20 प्रतिशत हो जाने से आम आदमी पर ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि 85 प्रतिशत भारतीय मोबाइल फोन के सिवा टैक्स वाली अन्य सेवाएं का उपभोग नहीं करते।”

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