5 काम जिन्हें करने से नहीं, सोचने पर भी लगता है पाप

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श्रीमद्भागवत हिंदू धर्म के अट्ठारह पुराणों में से एक है। इस ग्रंथ को श्रीमद् भागवत या केवल भागवतम् के नाम से भी जाना जाता है। इस पुराण का मुख्य विषय भक्ति योग है। भगवान श्रीकृष्ण ने अपने मुखारविंद से ज्ञान और नीति के बहुत सारे उपदेश देते हुए कहा है की 5 ऐसी चीजें हैं, जिनको करने से तो घोर पाप लगता है लेकिन उसके विषय में सोचने या अपमान करने से भी पाप और दुष्परिणाम झेलने पड़ते हैं।
श्लोक-
यदा देवेषु वेदेषु गोषु विप्रेषु साधुषु।
धर्मो मयि च विद्वेषः स वा आशु विनश्यित।।
इस श्लोक के अनुसार गाय, देवी-देवता, ऋषि-मुनि, वेद-पुराण और धर्म-कर्म के प्रति आस्था और श्रद्धा भाव रखना चाहिए।
गाय- हिंदू धर्म में गाय को माता का दर्जा दिया गया है। धर्मशास्त्रों में गौ माता की महिमा भरी पड़ी है। जिस व्यक्ति को ग्रह बाधा हो या ग्रहों की प्रीति नहीं हो पा रही हो, उस व्यक्ति को सरल, सहज व सुलभ तरीके से प्राप्त गौ माता की नित्य सेवा करनी चाहिए। जिस घर में प्रतिदिन गौ माता का पूजन होता है उस घर में माता लक्ष्मी की कृपा सदा बनी रहती है और अकाल मृत्यु कभी नहीं होती।
बलासुर नाम का एक राक्षस था। उसने देवताओं की समस्त गायों का अपहरण कर उन्हें कष्ट देना आरंभ कर दिया। देवताओं के राजा इन्द्र ने सभी गायों को मुक्त करवाकर बलासुर को मृत्यु के घाट उतार दिया था।
देवी-देवता- जिस प्रकार किसी भी पेड़-पौधे को सींचने के लिए सर्वप्रथम उसकी जड़ को सींचना पड़ता है फिर वह फल देता है ठीक वैसे ही श्री हरि विष्णु जड़ हैं और उन्होंने मानव कल्याण के लिए अलग-अलग देवी-देवताओं को कार्यभार सौंप रखें हैं। उनके प्रति मन में द्वेष भाव नहीं रखना चाहिए।
इतिहास साक्षी है रावण के विनाश का कारण बनी थी उसकी देवताओं से दुश्मनी।
ऋषि-मुनि- श्री हरि विष्णु को ऋषि-मुनि बहुत प्रिय हैं। उनसे मिलने का मार्ग ऋषि-मुनियों के प्रवचनों से होकर जाता है। जो व्यक्ति संतों का अपमान करता है या उनकी निंदा-चुगली करता है उन्हें कभी भगवान की प्राप्ति नहीं हो सकती।
महाभारत में एक प्रसंग के अनुसार दुर्योधन ने ऋषि मैत्रेय का अपमान किया था। उन्होंने क्रोधित होकर उसे युद्ध में मारे जाने का श्राप दिया था।
वेद-पुराण- वेद-पुराण सनातन संस्कृति की धरोहर हैं। उनका सम्मान करना हर व्यक्ति का धर्म है। इतिहास साक्षी है जिसने भी वेदों-पुराणों को हानि पंहुचाने का प्रयास किया भगवान ने स्वयं उन्हें दण्ड दिया है।

धर्म-कर्म- धर्म-कर्म न करने वाला या उन्हें हानि पंहुचाने वाला व्यक्ति कभी सुखी नहीं रह सकता। अश्वत्थामा आज तक इस कुकृत्य को करने की सजा भोग रहा है।

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