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भारतीय सेना की ये 13 रेजीमेंट्स हैं देश की शान, इनकी ताकत दुश्मनों में पैदा करती है खौफ़!

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देश का गौरव बनाए रखने और नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर देश की अपनी सेना होती है. जब 1947 में अंग्रेज़ भारत छोड़कर गए, तो भारत को उनसे थलसेना,वायुसेना और नौसेना मिली. भारतीय सेना में सैनिकों एवं अधिकारियों को विभिन्न रेजीमेंट्स में बांटा गया है. इन रेजीमेंट्स को ज़रूरत के हिसाब से मोर्चों पर भेजा जाता है. क्या आपको पता है कि भारतीय सेना में कितनी रेजीमेंट्स हैं? शायद आपको ये जानने की कभी ज़रूरत महसूस ना हुई हो, पर आपको अपनी देश की सेना के बारे में बहुत कुछ नहीं, तो थोड़ा बहुत तो पता ही होना चाहिए. हम यहां आपको भारतीय सेना की उन 13 रेजीमेंट्स से रू-ब-रू करवा रहे हैं, जो तिरेंगे को हमेशा ऊंचा रखने और भारतवासियों को भय से दूर रखने के लिए अपनी जान की भी परवाह नहीं करती. भारत की इन रेजीमेंट्स को हर भारतीय का सलाम!

1. पैराशूट रेजीमेंट

इस रेजीमेंट की स्थापना आज़ादी से पहले 29 अक्टूबर 1941 को हुई थी. मौजूदा समय में लेफ्टिनेंट जनरल एनकेएस घई इस रेजीमेंट के प्रमुख हैं. ये रेजीमेंट देश के सभी सैन्य बलों को हवाई मदद पहुंचाती है. सन 1999 में कारगिल युद्ध के समय 10 में से 9 पैराशूट बटालियन की तैनाती ऑपरेशन विजय के लिए हुई थी. कारगिल युद्ध में पैराशूट बटालियन 6 और 7 ने मुश्कोह घाटी को फतेह किया, वहीं पैराशूट बटालिन 5 ने बाटालिक प्वाइंट पर फतेह हासिल की.

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Source: pib

2. मैकेनाइज्ड इंफ्रेंट्री रेजीमेंट

भारत-पाकिस्तान युद्ध, 1965 के बाद भारतीय सेना को मैकेनाइज्ड इंफ्रेंटी रेजीमेंट की शिद्दत से ज़रूरत महसूस हुई. उसके बाद लंबे समय तक चली प्रक्रिया के फलस्वरूप 1979 में मैकेनाइज्ड इंफ्रेंटी रेजीमेंट की स्थापना हुई. मैकेनाइज्ड इंफ्रेंटी रेजीमेंट अबतक ऑपरेशन ‘पवन’ के तहत श्रीलंका, ऑपरेशन ‘रक्षक’ के तहत पंजाब और जम्मू-कश्मीर, ऑपरेशन ‘विजय’ के तहत जम्मू-कश्मीर में अपना जौहर दिखा चुकी है. साथ ही ये संयुक्त राष्ट्र शांति कार्यक्रमों में सोमालिया, कांगो, एंगोला और सिएरा लियोन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुकी है.

Source: wikimedia

3. पंजाब रेजीमेंट

पंजाब रेजीमेंट भारत के सबसे पुराने फौजी रेजीमेंट में से है. भारत-पाक बंटवारे के समय पंजाब रेजीमेंट का भी बंटवारा हुआ. जिसका पहला हिस्सा पाकिस्तान को मिला, तो दूसरी बटालियन भारत को. पंजाब रेजीमेंट विदेशों में शांति कार्यक्रमों में काफी सक्रिय रही. ‘लोगेंवाला’ की लड़ाई में पंजाब रेजीमेंट का जौहर हम सभी देख चुके हैं, जिसने पाकिस्तानी सेना को धूल चटा दी. हालांकि ऑपरेशन ‘ब्लूस्टार’ के समय बगावत की वजह से 122 अधिकारियों के कोर्टमार्शल होने जैसीभारतीय सेना के इतिहास की सबसे बड़ी घटना भी पंजाब रेजीमेंट में हुई.

Source: static

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