विडियो:इस महिला के डर से कांपता है आईएसआईएस !!

अगर कहा जाए कि पूरी दुनिया में आतंक का कहर बरपाने वाले आतंकी संगठन आईएसआईएस को एक महिला से डर लगता है, तो शायद ही कोई इस बात का यकीन करे।

वहीदा मुहम्मद अल-जुमैली की एक महिला ने आईएसआईएस के दिल में अपना खौफ बैठा दिया है। दरअसल वहीदा ने अपने बहुत करीबियों को इस आतंकी संगठन के खूनी हमले में खोया है। वहीदा अपने पिता और तीन भाइयों को पहले ही खो चुकी हैं और अब उनके दूसरे पति को भी इस साल की शुरुआत में मार दिया गया। इसी बात का बदला लेने के लिए वहीदा ने अपने दुश्मनों को ढूंढ-ढूंढ कर मारना शुरू कर दिया।

मोसुल से 50 मील दक्षिण की ओर एक जगह है, शिरक़त, जहां वहीदा रहती हैं। वहीदा 70 ट्राइबल मिलीशिया ग्रुप  को संचालित कर रही हैं।  उनकी ये फौज आईएसआईएस खत्म करने में सरकारी फौजों की सहायता करती है। एक इंटरव्यू के दौरान वहीदा ने कहा कि ‘मैं उनसे लड़ी, उनका सिर काटा, फिर उनके सिर को पकाया और उनके शरीर को जला दिया।

अब वहीदा आईएसआईएस की हिट लिस्ट में सबसे टॉप पर हैं। उन पर छह बार हमले हो चुके हैं। उनको बड़े-बड़े नेताओं से भी धमकी मिल रही है। वहीदा का कहना है कि अब तक वो 18 लोगों को मार चुकी हैं। वहीदा ने इससे पहले इराक़ के सुरक्षा दलों के साथ काम करना शुरू किया था, पर फिर 2004 में उन्होंने खुद ही लड़ना शुरू कर दिया। वहीदा को आईएसआईएस  के सरगना अबू बकर अल-बगदादी से भी धमकी मिल चुकी है।

आगे: यहां भी नेस्तनाबूत हो रहा है आईएसआईएस का खौफ

इराक में इस्लामिक स्टेट पर सबसे बड़ा हमला शुरू हो गया है। इराकी और गठबंधन सेनाएं आईएसआईएस के गढ़ मोसुल शहर से को खदेड़ने के अपने अभियान पर आगे बढ़ रही हैं। आईएसआईएस के खिलाफ निर्णायक मानी जा रही इस जंग में इराकी व गठबंधन सेनाओं के करीब 94 हजार जवान और 90 लड़ाकू विमान शामिल हैं। खबर है कि इराक की जमीन पर पिछले दो साल से अपने आतंक की बादशाहत कायम करने वाले आतंकवादी संगठन आईएसआईएस के आका अबू बकर अल बगदादी का अंत नजदीक आ चुका है।

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बताया जा रहा है कि बगदादी और उसकी फौज अब जान बचा कर भागने पर मजबूर हो जाएंगे क्योंकि इराकी सेना ने अमेरिका की अगुवाई वाली गंठबंधन फौज के साथ मिलकर इराक के दूसरे सबसे बड़ा शहर मोसुल को आईएसआईएस और बगदादी के चंगुल से छुड़ाने के लिए जंग छेड़ दी है। अब तक उसका सबसे मजबूत किला करीब करीब तबाह हो चुका है। इराक में आईएसआईएस के खिलाफ चल रही लड़ाई में मोसुल सबसे अहम पड़ाव साबित होगा। इस शहर को आईएसआईएस के कब्जे से छुड़ाने का संघर्ष ना केवल लंबा चलने की उम्मीद है, बल्कि इसमें काफी नुकसान और खूनखराबा होने की भी संभावना है।
गौरतलब है कि आक्रमण की शुरुआत सोमवार को इराक के कुर्द पेशमरगा लड़ाकों ने की थी। वह खुले इलाके में धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे हैं। इलाका पूरी तरह से विस्फोटकों से भरा है जहां थोड़ी सी गलती जान ले सकती है। यहां से लगातार काले और भूरे रंग का धुंआ उठ रहा है। इस अभियान को पूरा होने में कई हफ्तों का वक्त लग सकता है।

आईएसआईएस और आईएआईएस के खतरे से भारत को बचाने के लिए देश के 40 हिंदू संगठनों ने एकजुट होकर मुकाबला करने का फैसला किया है। कोयंबटूर में संगठन का शुभारंभ करते हुए फैसला लिया गया कि देश में आईएसआईएस के प्रचार प्रसार को रोकने के लिए हरसंभव प्रयास किया जाएगा और इससे लड़ने के लिए पूरी तैयारी की जाएगी।

इसके लिए संगठन ने फैसला लिया है कि संगठन के लोग देश के ऐसे-ऐसे हिस्से में जाएंगे जहां के युवा या लोग इन संगठनों में शामिल होने को लेकर दिलचस्पी दिखा रहे हैं। इनको शिक्षित करने का काम किया जाएगा साथ ही इन्हें इन संगठनों से देश को होने वाले नुकसान के बारे में भी जागरूक किया जाएगा।

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न्यूजरूम पोस्ट डॉट कॉम से बात करते हुए इस संगठन से जुड़े राम सेना के प्रमुख प्रमोद मुतालिक ने कहा कि इस संगठन का उद्देश्य धार्मिक उन्माद फैलाना नहीं है न ही संगठन किसी धर्म विशेष के लोगों को परेशान करने की कोशिश की जाएगी। बल्कि इस संगठन में मुस्लिम संगठनों को भी शामिल होने और सहयाग करने के लिए आमंत्रित किया जाएगा। संगठन का मूल उद्देश्य देश की भौगोलिक संरचना में हर जगह हर दिशा में शांति बनाए रखना और साथ ही ऐसीविनाशकारी ताकतों के चंगुल से देश को बचाए रखना होगा।

पिछले कई महीनों में देश में कई ऐसी घटनाएं घटित हुई हैं जिससे स्पष्ट लगने लगा है कि ये विनाशकारी ताकतें देश के कोने-कोने में युवाओं के अंदर राष्ट्रनिर्माण के बजाए राष्ट्र के विनाश के लिए प्रेरित कर रहे हैं। देश की कई खुफिया एजेंसियों की तरफ से भी इस बात को लेकर सरकार और प्रशासन दोनों को आगाह किया गया है।

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प्रधानमंत्री मोदी की कई विदेश यात्राओं के दरम्यान भी इन संगठनों की ताकतों को देश में नहीं पनपने देने की वकालत की गई है। सरकार इन संगठनों के बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंतित है ऐसे में अब संगठनों की जिम्मेवारी बनती है कि वह सरकार की इस चिंता को दूर करने और देश की शांति को बनाए रखने के लिए एक साथ मिलकर प्रयास करे। भारत से बाहर के कई देश भी आईएसआईएस जैसे संगठनों के विरोध के लिए उठाए जा रहे भारत के कदमों के समर्थन का आश्वासन दे चुके हैं।

हिंदू संगठनों के सदस्यों को इस बात की चिंता है कि देश के कई हिस्सो में आईएसआईएस जैसे संगठनों के झंडे लहराए जा रहे हैं तो कई हिस्सों में युवा इन संगठनों के पोशाक पहनकर प्रदर्शन कर रहे हैं। ऐसे में इन भटके युवाओं को प्रशिक्षित करने का काम संगठन को करना होगा। इसके लिए संगठन मुस्लिम समुदाय के लोगों से भी अपील करेगा की वह भी सहयोग देकर देश में आनेवाली इन विनाशकारी ताकतों को मुकाबला साथ मिलकर करें।

मुंबई के मालवणी इलाके से कथित तौर पर आईएस में शामिल होने के लिए घर छोड़ने वाले तीन युवकों में से एक को एटीएस ने पुणे से गिरफ्तार कर लिया है। महाराष्ट्र एटीएस ने मालवणी से लापता पांच युवकों में से एक वाजिद शेख को पुणे से लाकर मालवणी पुलिस को सौंपा। देर रात तक उससे पूछताछ के बाद घर जाने दिया गया।

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तीनों युवकों के परिजनों की ओर से सूचना दिए जाने के बाद पुलिस और एटीएस इनकी तलाश में जुटी हुई थी। एटीएस ने बताया कि उसने गिरफ्तार किए गए युवक से कई घंटे तक पूछताछ की। इसके बाद उसे परिजनों के हवाले कर दिया गया। दो अन्य लोगों के बारे में अभी कोई जानकारी नहीं मिल सकी है। मुंबई के मालवणी के तीन युवकों के सीरिया और इराक में सक्रिय खूंखार आतंकी संगठन आईएस में शामिल होने के लिए घर से निकलने की खबरें आई थीं।

मुंबई पुलिस ने घंटों पूछताछ के बाद जरूरी कागजात पर हस्ताक्षर कराकर वाजिद को घर तक छोड़ दिया पर जांच जारी रहने का दावा किया। हालांकि न तो पुलिस और न ही घरवाले अभी इस बात का खुलासा कर रहे हैं कि वाजिद इतने दिनों तक कहां और किसके साथ था। लापता हुए तीन युवक हैं, अयाज सुल्तान (23 साल), मोहसिन शेख (26 साल) और वाजिद शेख (25 साल)। जबकि 2 अन्य के भी लापता होने की सूचना मिल रही है।

 

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