चीन कर सकता हैं बड़ा हमला,चीन ने तैनात किए एंटी एयरक्राफ्ट गन समेत कई हथियार !

loading...

नई दिल्ली। दक्षिण चीन सागर में चीन एंटी एयरक्राफ्ट गन, मिसाइल डिफेंस सिस्टम के साथ कुछ खतरनाक हथियारों की तैनाती कर रहा है। चीन ने अपने इन हथियारों को उन सात नकली टापुओं पर तैनात कर दिया है, जिसे उसने दक्षिण चीन सागर में तैयार किया है। ये सनसनीखेज दावा किया है अमेरिकी थिंक टैंक ने, यानी अमेरिकी सुरक्षा को लेकर रिसर्च करने वाले लोगों की टीम ने। इस दावे के मुताबिक पूरी दुनिया को झांसे में रखकर चीन नकली टापुओं पर एंटी एयरक्राफ्ट गन और एंटी मिसाइल डिफेंस सिस्टम समेत कई हथियारों को तैनात कर रहा है। जबकि चीन ने दावा किया था कि उसके ये नकली टापू सिर्फ व्यापार बढ़ाने के मकसद से तैयार किए गए हैं। अपने दावे के समर्थन में अमेरिकी थिंक टैंक ने सैटेलाइट से ली गईं तस्वीरों को जारी किया है।

loading...

सैटेलाइट से ली गईं तस्वीरों में टापुओं पर हो रही हलचल से ऐसा लगा जैसे चीन किसी जंग की तैयारी कर रहा है। चीन की इस हरकत ने अमेरिकी समेत कई देशों को चिंता में डाल दिया है। सैटेलाइट से ली गईं तस्वीरों को एशिया मैरिटाइम ट्रांसपेरेंसी इनिशिएटिव यानी AMTI ने जारी किया है। तस्वीरों ने चीन के उस झूठ को बेनकाब कर दिया है, जिसमें उसने दावा किया था कि इन टापुओं का इस्तेमाल सिर्फ व्यापारिक मकसद के लिए किया जाएगा।

पिछले साल सितंबर में चीन के राष्ट्रपित शी जिनपिंग ने व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा से मुलाकात की थी। इस मुलाकात में नकली टापू के विवाद को ठंडा करने के मकसद से शी जिनपिंग ने ओबामा को भरोसा दिया था कि इस (नकली टापू) इलाके के सैन्यीकरण का चीन का कोई इरादा नहीं है।

लेकिन अब अमेरिका को लगता है कि चीन के इस वादे पर भरोसा करके उसने गलती की। इससे पहले भी इन टापुओं पर हथियारों और चीनी सैनिकों को देखे जाने की बात सामने आई थी, मगर चीन ने इसे गलत ठहरा दिया था। लेकिन अब सैटेलाइट से ली गईं इन तस्वीरों को वो झुठला नहीं सकता। अगस्त 2016 में पता चला था कि चीन ने 3 नकली टापुओं पर एयरक्राफ्ट हैंगर बना लिए हैं। ये एयरक्राफ्ट हैंगर इतने बड़े हैं कि चीन के H-6 बमवर्षक, H-6U टैंकर विमान, Y-8 मालवाहक विमान और KJ200 एवॉक्स विमान आसानी से रखे जा सकते हैं।

तब चीन ने सफाई दी थी कि ये हैंगर यात्री विमानों के लिए हैं। अपने दावे के समर्थन में चीन ने नकली टापुओं पर सैलानियों को ले जाने और लाने की तस्वीरें भी जारी की थीं। अगर तस्वीरों पर भरोसा किया जाए तो चीन सचमुच नकली टापुओं के जरिए पर्यटन को बढ़ावा दे रहा है। लेकिन हकीकत तो कुछ और है। अब सवाल उठता है कि टापुओं पर हथियारों की तैनाती के पीछे चीन का मकसद क्या है? अगर पिछले कुछ महीनों की घटनाओं पर नजर डालें तो हथियारों की तैनाती के पीछे चालबाज चीन का मकसद साफ समझ में आ जाएगा।

12 जुलाई चीन को हेग की अंतरराष्ट्रीय अदालत से झटका लगा। दक्षिण चीन सागर पर चीन के कब्जे को कोर्ट ने खारिज कर दिया। लेकिन चीन ने अंतरराष्ट्रीय अदालत के फैसले को मानने से इनकार कर दिया। इसके बाद अमेरिका ने चीन के इन टापुओं पर ऐतराज जताया। अमेरिका के टोही विमान चीन के नकली टापुओं की जासूसी कर चुके हैं।

इसके बाद चीन को लगता है कि अमेरिका दोबारा अपने टोही विमान इन टापुओं के ऊपर भेज सकता है, लिहाजा उसने एंटी एयरक्राफ्ट गन की तैनाती शुरू कर दी है। वैसे भी दक्षिण चीन का समुद्री रास्ता कारोबार के लिहाज से दुनिया के बेहद फायदेमंद रास्तों में एक है। यहां से हर साल अरबों का कारोबार होता है, इसपर इस इलाके के समुद्र को प्राकृतिक गैस और तेल का अपार भंडार भी माना जाता है। जाहिर है इसपर कब्जे की चीन की कोशिश को नाकाम करने में अमेरिका एक अरसे से जुटा हुआ है, और चीन भी उसे बराबर की टक्कर देने पर आमादा है। लिहाजा इस इलाके में जंग की आशंका लगातार बनी हुई है।

loading...
loading...
loading...