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अगर तीसरा विश्व युद्ध हुआ तो ये होगी सबसे बड़ी वजह !

कहते है कि एक बड़े युद्ध से पहले और युद्ध के बाद गहरी शांति छा जाती है. कभी-कभी कोल्ड वॉर का दौर शुरू हो जाता है और तब ऐसा लगने लगता है कि अब युद्ध होकर रहेगा, पर वास्तव में उस वक़्त युद्ध नहीं होता. वो बिगुल होता है एक विध्वसंक युद्ध का. विश्व अभी तक दो युद्धों से गुज़र चुका है. पर क्या संभावना है तृतीय विश्व युद्ध के होने की? हालात कुछ ऐसे बनते नज़र आ रहे हैं, जिनको देख कर वर्ल्ड वॉर की संभावनाओं को नकारा नहीं जा सकता. आजकल विश्व के विभिन्न सम्मेलनों में दो देशों के प्रतिनिधियों के चेहरे पर असंतुष्टि के भाव देखे जा सकते हैं. ये बिलकुल वैसा ही संकेत है, जैसा सेकंड वर्ल्ड वॉर के समय देखने को मिला था. विश्व के तमाम देश अपनी सहूलियत के हिसाब से ग्रुप बनाने में जुट गए थे. दूसरी ओर ISIS नाम का आंतकवादी संगठन दुनिया की मुश्किलें और बढ़ा रहा है.

आइये जानते हैं अगर अगला विश्व युद्ध होगा तो उसके मुख्य कारण क्या-क्या होंगे?

1. सीरिया मुद्दा

सीरिया में गृह युद्ध 2011 में शुरू हुआ था. उस समय आन्दोलनकारियों ने अपने शासक बशर-अल-अस्सद के खिलाफ़ हथियार उठा लिए थे. कुछ लोगों का ऐसा मानना है कि इसमें अमेरिका का हाथ था. अस्सद के खिलाफ़ बगावत में इस्तेमाल किये गये सारे हथियार और विद्रोह के लिए सारा पैसा अमेरिका से आया था. वहीं दूसरी ओर, अस्सद रूस का समर्थक था और रूस ने उसको शासक बनाए रखने के लिए विद्रोहियों का दमन करने में मदद की. रूस को ये भी लग रहा था कि अमेरिका सीरियाई क्षेत्र को हथियाना चाहता था.

इस्लामिक स्टेट भी इस पर कब्ज़ा जमाने की फिराक में है. रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने कई बार ऐसा कहा है कि IS अमेरिका का बनाया एक आतंकी संगठन है और वो उसी के पैसों पर जीता है. अमेरिका ने इसका विरोध किया है और IS के दमन के लिए वहां अपनी फौज भेज डाली. रुस ने भी वहां IS की टुकड़ियों को मिटाने के लिए फाइटर प्लेन से हमला किया. तुर्की का विरोध और रूस से उसका उलझना, फिर US का बीच-बचाव ऐसे कई वजह हैं, जिनके कारण दोनों देशों में अब तक तनातनी का माहौल है.

2. East and South China Sea (China Vs Japan, Vietnam, Philippines led by US)

जब से जापान, वियतनाम और फ़िलीपीन्स ने East and South China Sea के विभिन्न हिस्सों पर अपना हक जताया है, तब से चीन उनका विरोध कर रहा है. अब ये मुद्दा वैश्विक मुद्दा बनता जा रहा है. पूर्व में, चीन और जापान एक दूसरे से Senkaku Islands से जुड़ते हैं. ये आइलैंड बहुत ही खास है और इसके साथ एक और Diaoyu Islands आइलैंड इन दोनों देशों की कलह का मुख्य कारण है.

अब दक्षिणी चीन सागर के साथ समस्या ये है कि इसके साथ एक आइलैंड जुड़ा है, जो चीन से ज़्यादा फिलीपींस के करीब है, पर दोनों देश इस पर अपना दावा करते हैं. पर अभी इस पर चीन का कब्ज़ा है. चीन ने इंटरनेशनल ट्रिब्यून का फैसला भी मानने से इंकार कर दिया है. इस फैसले में कहा गया था कि ये आइलैंड फिलीपिंस का हिस्सा है. चीन की ऐसी मनमानी से वैश्विक खतरा बढ़ता जा रहा है.

3. Russia-Ukraine Over Crimea

रुसी संघ ने क्रीमिया को 2014 में मिला लिया था. उससे पहले ये यूक्रेन का एक स्वशासित अंग था. पर राष्ट्रपति पुतिन ने कई वैश्विक शक्तियों का सहारा लेकर उसे अपने आधीन कर लिया. उस समय तो ये मसला ठंडा पड़ गया था, पर उसके बाद विश्व में गुट बनने लगे. चीन रूस का खुलेआम समर्थन कर रहा है, तो US युक्रेन के साथ है. हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा ने एक घोषणा की थी कि हम रूस को युक्रेन की जनता का हक नहीं खाने देंगे. सीरिया के बाद ये दूसरा मसला है, जहां रूस और अमेरिका उलझे हुए हैं.

4. India vs Pakistan Over Kashmir

दो नाभिकीय हथियारों से संलग्न देश ज़मीन के टुकड़े के लिए बुरी तरह उलझे हुए हैं. पाकिस्तान अभी बहुत ही बुरे हाल में है, वो अपने घर में पैदा हो रहे आंतकवाद का स्वभोगी है. 1947 में आज़ादी मिलने के बाद पाकिस्तान ने जब जम्मू और कश्मीर के कुछ हिस्सों पर हमला कर दिया तो वहां के राजा ने भारत से बचाव की गुहार लगायी. तब तक जम्मू किसी भी देश का हिस्सा नहीं था. भारत ने उनकी मदद की और बदले में उनसे भारत में विलय होने के दस्तावेज पर हस्ताक्षर भी करवाए. उसके बाद से अब तक इसके लिए दोनों देशों के बीच 4 लड़ाईयां लड़ी जा चुकी हैं. पाकिस्तान को कथित रूप से चीन का समर्थन प्राप्त है. ऐसे में ये युद्ध फिर होता है, तो कई देशों के लिए खतरा हो जाएगा.

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