बड़ी मुश्किल : मुलायम सिंह ने समाजवादी पार्टी को बना दिया मजाक , रामगोपाल को फिर निकाला !!

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समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह पार्टी घमासान को लेकर पूरी तरह कंफ्यूज नजर आ रहे हैं। वो अपने किसी भी स्‍टैंड पर खरे नहीं उतर रहे हैं।

New Delhi Jan 01 : उत्‍तर प्रदेश में चल रहे समाजवादी पार्टी के झगड़े की हालत अब ऐसी हो गई है कि राजनीति के बड़े-बड़े जानकारों ने भी अपना सिर पकड़ लिया है। उन्‍हें भी समझ नहीं आ रहा है कि अगले पल समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव किस करवट बैठेंगे। पता नहीं कब वो किसे पार्टी से बाहर निकाल दें और पता नहीं कब उसी व्‍यक्ति को पार्टी में दोबारा बुला लें। यही हाल उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री और मुलायम सिंह के बेटे अखिलेश यादव और उनके चाचा रामगोपाल यादव का है। लेकिन, लोगों का कहना है कि कम से कम ये दोनों लोग अपने स्‍टैंड पर कायम तो हैं। लेकिन, नेता जी को ना तो कोई स्‍टैंड ले पा रहे हैं और ना ही उस पर कायम रह पा रहे हैं। जिससे विवाद खत्‍म होने की बजाए लगातार बढ़ता ही जा रहा है।

लोगों का कहना है कि समाजवादी पार्टी के इस झगड़े में अब पार्टी सिर्फ मजाक बन कर रह गई है। तीन दिन के भीतर ही मुलायम सिंह यादव ने रामगोपाल यादव को दूसरी बार पार्टी से निष्‍कासित कर दिया है। इस पूरे प्रकरण में वो अब तक दो बार पार्टी से छह-छह साल के लिए निकाले जा चुके हैं। जिसमें दो बार उनकी घर वापसी हो चुकी है। मुलायम के इसी तरह के फैसले पर अब उन पर सवाल उठने शुुरु हो गए हैं। दरअसल, रामगोपाल यादव ने रविवार को लखनऊ के जनेश्‍वर मिश्रा ग्राउंड में समाजवादी पार्टी की आपातकालीन राष्‍ट्रीय अधिवेशन बुलाया था। लेकिन, इस अधिवेशन के शुरु होने से पहले ही मुलायम सिंह यादव ने लेटर जारी कर इस पूरी तरह असंवैधानिक और पार्टी विरोधी करार दिया था।

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लेकिन, नेता जी की चिट्ठी को दरकिनार करते हुए रामगोपाल यादव ने इस राष्‍ट्रीय अधिवेशन में ना सिर्फ अखिलेश यादव को पार्टी का अध्‍यक्ष बनाने का एलान कर दिया बल्कि अमर सिंह को भी पार्टी से बाहर निकाल दिया। शिवपाल यादव को भी यूपी प्रेसिडेंट के पद से हटा दिया गया। इसी बात से नाराज मुलायम ने अब एक बार फिर रामगोपाल यादव को पार्टी से छह साल के लिए निष्‍कासित कर दिया है। इसके साथ ही रविवार को हुए अधिवेशन को पूरी तरह असंवैधानिक बताते हुए 5 जनवरी को दोबारा पार्टी का राष्‍ट्रीय अधिवेशन बुलाए जाने की घोषणा कर दी। ये राष्‍ट्रीय अधिवेशन भी भी उसी जगह बुलाया गया है जहां रविवार को रामगोपाल यादव ने बुलाया था। यानी जनेश्‍वर मिश्रा पार्क में।

इससे पहले जब अखिलेश यादव और रामगोपाल यादव को पार्टी से बाहर निकाला गया था तो यूपी सरकार के कैबिनेट मंत्री आजम खान ने इस पूरे मामले में संकटमोचन की भूमिका निभाई थी और सुलह कराने की कोशिश की थी। जिसमें वो कामयाब भी हुए थे। कुछ घंटों के भीतर ही दोनों के संस्‍पेशन को रद्द कर दिया गया था। लेकिन, एक बार फिर रामगोपाल यादव के निलंबन से ये सवाल उठने लगा है कि आखिर ऐसी कौन सी मजबूरी है कि मुलायम सिंह जैसे राजनीति के दिग्‍गज खिलाड़ी अपने ही फैसले पर अडि़ग नहीं रह पा रहे हैं। क्‍या वो जान बूझकर पार्टी को मजाक बनाना चाहते हैं या फिर उनके सलाहकार ही उन्‍हें लगातार ऐसी सलाह दे रहे हैं जिससे उनके खुद का कंफ्यूजन बढ़ता ही जा रहा है।

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