बड़ी खबर : समाजवादी पार्टी में अब ‘सत्ता’ की जंग, मुलायम-अखिलेश दोनों चाहते हैं “साइकिल”!!

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मुलायम ने 5 जनवरी को बुलाया गया समाजवादी पार्टी का अधिवेशन रद्द कर दिया है

New Delhi, Jan 2 : औपचारिक तौर पर भले नहीं हुआ हो लेकिन समाजवादी पार्टी दोफाड़ हो चुकी है, एक तरफ अखिलेश यादव हैं जिन्हें उनका खेमा राष्ट्रीय अध्यक्ष तक चुन चुका है, वहीं दूसरी तरफ मुलायम और शिवपाल यादव का खेमा है जो अखिलेश गुट के सम्मेलन और फैसलों को अवैध बता रहा है। दोनों गुटों के बीच अब समाजवादी पार्टी के चुनाव चिह्न साइकिल पर ‘कब्जे’ की जंग शुरू हो गई है। साइकिल की सवारी करके ही मुलायम उत्तर प्रदेश में कई बार मुख्यमंत्री बने और साइकिल पर ही चढ़ कर पिछले चुनाव में अखिलेश यादव ने पूरा उत्तर प्रदेश छान मारा था और सत्ता में पहुंचे थे, इसीलिए साइकिल दोनों के लिए ही महत्वपूर्ण है।

पिता मुलायम और बेटे अखिलेश का गुट दोनों ही साइकिल चुनाव चिह्न पर दावा जता रहे हैं, दोनों ही गुट साइकिल पर अपनी दावेदारी को लेकर चुनाव आयोग से गुहार लगाने वाले हैं। मुलायम सिंह यादव आज दिल्ली में ही अपने दोस्त अमर सिंह से मुलाकात करेंगे और उनके साथ शिवपाल यादव भी होंगे। अखिलेश गुट द्वारा बाहर किए गए अमर सिंह, लंदन से दिल्ली पहुंच रहे हैं। इसी बीच मुलायम सिंह यादव ने 5 जनवरी का अधिवेशन स्थगित कर दिया है। शिवपाल यादव ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है। समझा जा रहा है कि इसके पीछे एक बड़ी वजह ये भी हो सकती है कि पार्टी का बड़ा हिस्सा अखिलेश यादव के साथ है, शायद मुलायम गुट को अपने सम्मेलन की नाकामी और फिर किरकिरी होने का डर सता रहा हो।

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वैसे साइकिल चुनाव चिह्न के लिए चुनाव आयोग जाने की तैयारी अकेले मुलायम खेमे में ही नहीं है, अखिलेश खेमा भी साइकिल पर दावेदारी के लिए चुनाव आयोग पहुंचेगा। ‘साइकिल’ किसकी होगी यह तय करने के लिए चुनाव आयोग में एक निर्धारित प्रक्रिया है, आयोग ये देखेगा कि कार्यकारिणी के कितने सदस्य या विधायक, सांसद और पार्टी के कितने उम्मीदवार किसके साथ हैं। इसी आधार पर चुनाव आयोग ये तय करेगा कि असली समाजवादी पार्टी कौन है। हालांकि इसमें समय लगेगा और चुनाव आयोग के निर्णय के खिलाफ अदालत जाने का विकल्प भी खुला रहेगा। एक खतरा ये भी है कि चुनाव आयोग समाजवादी पार्टी का चुनाव चिन्ह ‘साइकिल’ फ्रीज कर दे।

फिलहाल जो स्थिति है उसमें अखिलेश का पलड़ा ही भारी है। पार्टी के ज्यादातर विधायक अखिलेश के साथ ही हैं। अखिलेश यादव की सांसद पत्नी डिंपल यादव, राज्यसभा सांसद चाचा रामगोपाल यादव तो खुले तौर पर साथ हैं ही, मुलायम और अमर सिंह को छोड़ कर अन्य सांसद भी अखिलेश के साथ ही बताए जा रहे हैं। आपको बताते चलें कि अखिलेश खेमा मुलायम सिंह यादव को पार्टी का मार्गदर्शक और उनकी जगह अखिलेश यादव को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव पास कर चुका है। इसके साथ ही शिवपाल यादव को प्रदेश अध्यक्ष पद तथा अमर सिंह को पार्टी से हटाने का भी प्रस्ताव भी पार्टी कार्यकर्ताओं ने ध्वनि मत से पास कर दिया है। अखिलेश खेमे द्वारा बनाए गए नए प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम अपने समर्थकों के साथ समाजवादी पार्टी के कार्यालय पर पहुंचकर उस पर कब्जा भी कर लिया है। बहरहाल पार्टी कार्यालय के बाहर भारी संख्या में पुलिस की तैनाती कर दी गई है।

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