बड़ा झटका : सुप्रीम कोर्ट ने लिया बड़ा फैसला,अब धर्म के नाम पर वोट मांगने वाले क्या करेंगे ?

loading...

सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले के जरिए सियासी दलों को जोरदार झटका दिया है। अब धर्म और जाति के नाम पर वोट मांगने वाले क्या करेंगे।

New Delhi, Jan 02: देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट ने देश में सियासत के मौजूदा चलन को बदलने वाला एक फैसला सुनाया है। धर्म के नाम पर वोट मांगने का चलन हमारे देश में काफी पुराना है। कोर्ट के एक आदेश के बाद धर्म के नाम पर सियासत चमकाने वाले तो सियासी तौर पर बेरोजगार हो जाएंगे। SC ने अपने फैसले में कहा है कि चुनाव केदौरान धर्म के नाम पर वोट मांगना गैरकानूनी है। कोर्ट ने ये फैसला हिंदुत्व केस को लेकर सुनवाई के दौरान दिया है। दोनों पक्षों की दलील को सुनने के बाद कोर्ट ने ये फैसला सुनाया है। ये फैसला इसलिए खास और अहम हो जाता है क्योंकि इसी साल 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। इनमें उत्तर प्रदेश और पंजाब जैसे महत्वपूर्ण राज्य शामिल हैं।

अपने फैसले के दौरान सुप्रीम कोर्ट की 7 जजों की संवैधानिक पीठ ने कहा है कि धर्म, भाषा और जाति के नाम पर वोट नहीं मांगे जा सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि भारत का संविधान इसकी इजाजत नहीं देता है। हमारा संविधान धर्मनिरपेक्ष है। इसकी धर्मनिरपेक्षता बनाए रखना सबकी जिम्मेदारी है। चुनाव के दौरान उम्मीदवार या फिर एजेंट धर्म का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं। धर्म को हथियार बनाकर वोट मांगना गैरकानूनी है। SC के इस फैसले के बाद सियासी दलों में सुगबुगाहट तेज हो गई है। धर्म, जाति और भाषा के नाम पर वोट मांगने का चलन हमारे देश में काफी पुराना है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव एक धर्मनिरपेक्ष अभ्यास है। ये हमेशा ऐसा ही रहना चाहिए। अब कोर्ट के फैसले के बाद देश में चुनावों का तरीका बदल सकता है।

loading...

 

अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने हालांकि ये भी साफ किया है कि किसी शख्स और भगवान के बीच का रिश्ता उसका व्यक्तिगत मामला है। इस रिश्ते में किसी भी तरह का दखल नहीं दिया जा सकता है। बता दें कि हिंदुत्व से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने ये एतिहासिक फैसला लिया है। इससे पहले तीस्ता सीतलवाड़ ने एक याचिका मेें कोर्ट से दखल देने की मांग करते हुए कहा था कि धर्म और राजनीति को एक साथ नहीं मिलाया जाना चाहिए। याचिका में कहा गया था कि धर्म को राजनीति से अलग रखने का निर्देश दिया जाना चाहिए। कोर्ट ने अपने फैसले के जरिए भारतीय राजनीति में एक लकीर खींच दी है। लकीर के एक तरफ वो नेता और सियासी दल हैैं जो धर्म के सहारे जनता से वोट मांगते हैं.

बता दें कि देश में धर्म के नाम पर सियासत करना आजादी के बाद से ही शुरू हो गया है। पहले धर्म के नाम पर फिर जाति के नाम पर वोट मांगना शुरू हुआ था। SC के इस फैसले का असर उत्तर प्रदेश और पंजाब समेत पांचों राज्यों के विधानसभा चुनाव पर पड़ेगा। उत्तर प्रदेश में तो खास तौर पर जातिगत राजनीति जोरदार तरीके से होती है। धर्म और जातियों को वोटबैंक समझा जाता है। कौन से संप्रदाय और जाति के लोग किस पार्टी को वोट करेंगे इसका पूरा आंकड़ा जुटाया जाता है। उसके आधार पर रणनीति तय की जाती है। कई बार तो जातियों में उपजातियां बना दी जाती है। जिस से उस जाति से आने वाले मतदाताओं को लुभाया जा सके। खास बात ये है कि धर्म और जाति के नाम पर वोट मांगने वाले नेताओं चुनाव के बाद सब कुछ भूल जाते हैें।

loading...