NRAI : ग्राहक को सर्विस चार्ज नहीं देना तो होटल में न खाएं खाना !!

सरकार कह चुकी है कि अगर ग्राहक सेवा से संतुष्ट नहीं है तो वह सर्विस चार्ज को हटवा सकता है।

New Delhi, Jan 3 : अगर आप अब रेस्टोरेंट या होटल में खाने-पीने जाते हैं और वहां सर्विस चार्ज मांगा जाता है तो आप उसे मना भी कर सकते हैं। उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान ने ट्वीट कर साफ किया है कि रेस्टोरेंट टैक्स के अलावा सर्विस चार्ज वसूल रहे हैं, सर्विस चार्ज वैकल्पिक है, उपभोक्ता पर निर्भर है कि वो सर्विस चार्ज देना चाहता है या नहीं। सरकार के इस फैसले पर नेशनल रेस्टेरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एनआरएआई) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और इसके खिलाफ अपना पक्ष रखने के लिए कानूनी सहारा लेने का संकेत दिया है। एनआरएआई ने अपने बयान में ये तक कहा है कि अगर उपभोक्ताओं को अगर सर्विस चार्ज नहीं चुकाना है तो वे होटल या रेस्टोरेंट में खाना नहीं खाएं।

रेस्टोरेंट मालिकों का कहना है कि सरकार का ये फैसला झगड़ा फैलाने वाला है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एनआरएआई के अध्यक्ष रियाज अमलानी का कहना है कि रेस्टोरेंट के मेन्यू में साफ लिखा होता है कि कितना सर्विस चार्ज लगाया जाएगा। हम कोई गलत काम नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सर्विस चार्ज की रकम कर्मचारियों में ही बांट दी जाती है। अलमानी के मुताबिक सर्विस चार्ज हटाने की जगह कई रेस्टोरेंट उपभोक्ताओं से पूछ सकते हैं कि क्या वे सर्विस चार्ज चुकाना चाहते हैं और अगर नहीं तो वह ऐसी जगह खाना खाएं जहां सर्विस चार्ज नहीं लिया जाता हो। उनके मुताबिक सर्विस चार्ज लगाना एक आम और मान्य तरीका है।

सरकार की तरफ से कहा गया है कि रेस्टोरेंट-होटल को बोर्ड पर ये लिखना होगा कि सर्विस चार्ज वैकल्पिक है, असंतुष्ट ग्राहक सर्विस चार्ज को बिल से हटवा सकते हैं। अगर इसके बाद भी कोई धोखे से सर्विस चार्ज वसूलता है तो उपभोक्ता संरक्षण कानून 1986 के प्रावधानों के तहत इस बारे में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। आपको बताते चलें कि अभी होटल और रेस्टोरेंट में सर्विस टैक्स और सर्विस चार्ज वसूला जाता है। सर्विस टैक्स वो है जो सर्विस देने पर सरकार टैक्स लगाती है और सर्विस चार्ज वो जो रेस्त्रां या होटल लगाता है। सर्विस टैक्स सरकार के खजाने में जाता है और सर्विस चार्ज वसूलने वाले होटल या रेस्टोरेंट की जेब में। सर्विस टैक्स की प्रभावी दर बिल की 6 फीसदी है जबकि सर्विस चार्ज 5 से 20 फीसदी तक लगाया जाता है।

जाहिर है सर्विस चार्ज होटल या रेस्टोरेंट को होने वाली आमदनी का प्रमुख हिस्सा है। रेस्तरां चेन से जुड़े लोगों का कहना है कि सर्विस चार्ज वैकल्पिक किया गया तो इसका दुरुपयोग किए जाने की पूरी आशंका है। एक रेस्टोरेंट मालिक का कहना था कि उपभोक्ता मामलों को चीजें बारीकी से साफ करनी चाहिए थीं, क्योंकि उपभोक्ता कहे कि रेस्तरां का सारा खाना अच्छा था लेकिन सलाद खराब, तो ऐसी स्थिति में रेस्टोरेंट क्या कर सकता है। उन्होंने कहा कि जो भी शिकायतें आती हैं वह ज्यादा टैक्स को लेकर आती हैं, सर्विस चार्ज की नहीं। सरकार ने टैक्स नहीं हटाए लेकिन सर्विस चार्ज हटा दिया जो उपभोक्ता खुशी से देते हैं।

loading...
loading...