बड़ी खबर : बीजेपी चाहती है कि यूपी में मुस्लिम वोटबैंक समाजवादी पार्टी के ही साथ रहे, लेकिन क्यों??

यूपी में समाजवादी पार्टी के ‘दंगल’से बीजेपी परेशान है, लेकिन इसलिए नहीं कि उसे मुलायम से कोई सहानुभूति है या अखिलेश से कोई बैर!

New Delhi, Jan 4 : उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी पारिवारिक ‘दंगल’ के बाद दो फाड़ हो चुकी है। एक तरफ अखिलेश यादव का खेमा है जो पार्टी के ज्यादातर विधायकों और सांसदों के साथ खुद को ही मुख्य पार्टी बता रहा है तो दूसरी तरफ मुलायम सिंह यादव और शिवपाल यादव हैं जो पार्टी और पद-प्रतिष्ठा सब बचाने के लिए परेशान हैं। बीजेपी के कुछ नेता समाजवादी पार्टी के इस पारिवारिक झगड़े को अब तक समाजवादी पार्टी का अंदरूनी मामला बता रहे थे, तो कुछ नेता दिखावा और जानबूझ कर किया गया ड्रामा बताते रहे हैं, लेकिन जैसे-जैसे ये झगड़ा अंजाम तक पहुंचता जा रहा है और पार्टी दो फाड़ दिखाई देने लगी है बीजेपी की परेशानियां बढ़ने लगी हैं।

बीजेपी की असली परेशानी मुस्लिम वोटबैंक है जो कि समाजवादी पार्टी के इस झगड़े से इस पार्टी से दूर जाता दिखाई दे रहा है। मुस्लिम वोटबैंक बीजेपी की तरफ तो जाएगा नहीं, उसकी स्वाभावित जगह ऐसे में बीएसपी बनती है। बीजेपी की असल चिंता यही है। मायावती काफी समय से मुस्लिम वोटबैंक को लुभाने की कोशिश में लगी रही हैं और लगभग हर रैली में उन्होंने दलितों के साथ ही मुसलमानों से बीएसपी के पक्ष में वोट करने की अपील की है। मायावती दलित-मुस्लिम गठजोड़ की कोशिश में लगी हैं और बीजेपी की परेशानी यही है कि समाजवादी पार्टी के झगड़े से मायावती की राह आसान होती जा रही है।

हालात को देख कर मायावती ने भी मौके पर चौका मारने की कोशिश की है। उन्होंने बाकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा है कि मुलायम सिंह यादव का यादव वोट अखिलेश और शिवपाल के खेमों में बंट गया है जो एक-दूसरे को हराने में लग गया है। मायावती ने कहा है कि अब मुस्लिम समुदाय के लोगों को अपना वोट सपा के दोनो खेमों में बांटकर बिल्कुल भी खराब नहीं करना चाहिए, वरना फिर इसका सीधा लाभ बीजेपी को मिलेगा। मायावती ने मुसलमानों को भरोसा दिलाया है कि दलितों के वोट यूपी के सभी 403 विधानसभा सीटों पर हैं और कहीं भी कम नहीं हैं, मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में केवल मुस्लिम और दलितों का वोट मिलने से ही बीएसपी जीत जाएगी, इसलिए मुस्लिम समाज के लोग अपना वोट सपा के दोनों खेमों को देकर न बांटें।

मायावती ने जो कहा है उसे बीजेपी अच्छी तरह से समझती है कि मुसलमान अगर बीएसपी की तरफ चले गए तो उत्तर प्रदेश में उसका बना-बनाया खेल बिगड़ सकता है। उत्तर प्रदेश में दलितों की संख्या करीब 22 फीसदी है और मुसलमानों की संख्या 18 फीसदी के करीब। ये आंकड़ा मिलाकर 40 फीसदी का हो जाता है और इसमें 5-7 फीसदी की कमी आती है तो भी मायावती भारी पड़ सकती हैं। बीजेपी परेशान है कि वो मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव के बीच की दरार से उपजने वाले वोटों के मायावती के पक्ष में ध्रुवीकरण को कैसे रोके। इन्हीं मुश्किलों ने पार्टी की चुनावी रणनीति को पलट कर रख दिया है।

कहा तो यहां तक जा रहा है कि बीजेपी के दिग्गज इन दिनों इस माथापच्ची में जुटे हैं कि कैसे समाजवादी पार्टी के गिरते ग्राफ को रोका जाए। इसके लिए कई अहम मुद्दों पर काम किया जा रहा है। पार्टी सूत्रों की मानें तो रणनीति इस बात पर ज्यादा है कि अल्पसंख्यक मतों का ध्रुवीकरण एक पक्ष में न हो पाए। पार्टी का साफ तौर पर मानना है कि समाजवादी पार्टी के टूटने या मुलायम के कमजोर होने का फायदा बीएसपी को मिल सकता है, क्योंकि तब बेहतर विकल्प के तौर पर अल्पसंख्यक मतों का ध्रुवीकरण बीएसपी की तरफ ही होगा।

इस दिशा में बीजेपी के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय ने एक ट्वीट के जरिए बीजेपी की रणनीति का खुलासा भी कर दिया है। इस ट्वीट में मुलायम को बाबर भक्त बताया गया है जिसके वंशजों ने सत्ता की खातिर अपने पिता को भी जेल में डाल दिया था। विजयवर्गीय इस मैसेज के जरिए मुलायम के भविष्य को तो बताने की कोशिश कर ही रहे हैं, साथ ही उन्हें मुसलमानों के करीब भी बता रहे हैं। यह बीजेपी की बदली हुई चुनावी रणनीति की तरफ इशारा करता है जिसमें मुलायम सिंह को मुसलमानों के साथ जोड़ते हुए ये बताने की कोशिश होगी कि मुस्लिमों के करीब अगर कोई है तो वो है समाजवादी पार्टी।


Kailash-Vijayvargiya-Tweetबीजेपी चाहती है कि किसी तरह मुस्लिम वोटों के छिटकने से रोका जाए ताकि इसका फायदा बीएसपी को नहीं मिले और इसीलिए आने वाले वक्त में बीजेपी इसी रास्ते पर और आगे बढ़ती दिखाई दे सकती है और बीजेपी का ये जुमला और ज़्यादा सुनाई देगा। समाजवादी पार्टी के दंगल का फायदा उठाने के लिए बीजेपी ने टिकट बंटवारे का प्लान भी बदल दिया है। पार्टी इस बार दो दर्जन से ज़्यादा यादव उम्मीदवार मैदान में उतार सकती है। मुलायम के वोटर समझे जाने वाले यादव वोटबैंक में सेंध लगाने के लिए पार्टी उन इलाकों में यादव उम्मीदवार उतारने की योजना बना रही है जहां मुस्लिम-यादव वोटर अधिक संख्या में हैं।

बीजेपी की कोशिश ये है कि मुस्लिम वोटबैंक अब समाजवादी पार्टी के खेमों में ज्यादा से ज्यादा बंटे, इसके साथ ही ओबीसी वोटों में वो ज्यादा से ज्यादा सेंध लगा सके। बीजेपी के लिए अर्से बाद ये स्थिति आई है कि बीजेपी के इतने ज़्यादा सांसद उत्तर प्रदेश से हैं बल्कि खुद प्रधानमंत्री भी राज्य से ही चुनाव जीते हैं। पीएम मोदी के नाम पर बीजेपी ओबीसी वोटों को लुभाने की कोशिश में है, हर रैली और प्रचार के दौरान पार्टी का ज़ोर ये बताने पर् होगा की इस वर्ग के इतने मंत्री कैबिनेट में होना ये संकेत है कि पार्टी सिर्फ ब्राह्मणों के लिए नहीं, बल्कि ओबीसी के लिये भी खूब सोचती है। बदले हालात में बीजेपी के निशाने पर अब समाजवादी पार्टी कम और बीएसपी का कथित भ्रष्टाचार ज्यादा रहने वाला है। साफ है कि समाजवादी झगड़े से यूपी का चुनाव बीजेपी बनाम बीएसपी बनता जा रहा है।

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