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उत्तराखंड

नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में नवीनतम तकनीकों और उपचार पद्धतियों पर हुआ मंथन

Aarti Verma
Last updated: 2026/08/16 at 3:37 PM
Aarti Verma
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8 Min Read
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नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में नवीनतम तकनीकों और उपचार पद्धतियों पर हुआ मंथन

सुभारती ऑप्थाकॉन-2026 में देशभर के विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव, ऑक्यूलर ट्रॉमा पर विशेष सत्र रहा आकर्षण का केंद्र 

 

देहरादून। गौतम बुद्ध चिकित्सा महाविद्यालय एवं संबद्ध डॉ. के.के.बी.एम. सुभारती अस्पताल, झाझरा, देहरादून के नेत्र रोग विभाग एवं मेडिकल एजुकेशन यूनिट की ओर से द्वितीय डॉ. के.के. भटनागर मेमोरियल वार्षिक सीएमई—“सुभारती ऑप्थाकॉन-2026” का आयोजन रविवार को किया गया। कार्यक्रम में नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों, चिकित्सकों, फैकल्टी सदस्यों एवं नेत्र रोग विशेषज्ञता के रेजिडेंट्स ने प्रतिभाग कर आधुनिक नेत्र चिकित्सा, विशेष रूप से ऑक्यूलर ट्रॉमा (नेत्र संबंधी चोटों) के उपचार एवं प्रबंधन से जुड़े नवीनतम अनुभवों और तकनीकों पर विस्तृत चर्चा की।

कार्यक्रम का आयोजन स्वर्गीय श्री डॉ. के.के. भटनागर की स्मृति एवं उनके प्रति सम्मान को समर्पित रहा। कार्यक्रम में सुभारती ग्रुप के संस्थापक प्रो. डॉ. अतुल कृष्ण एवं चान्सलर डॉ. यशवर्धन का मार्गदर्शन एवं आशीर्वाद आयोजन की प्रेरणा का प्रमुख आधार रहा।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में श्री सुबोध उनियाल जी, माननीय स्वास्थ्य मंत्री, उत्तराखंड राज्य ने शिरकत की। उन्होंने सुभारती ऑप्थाकॉन-2026 जैसे वैज्ञानिक एवं अकादमिक आयोजन को चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि चिकित्सा के क्षेत्र में निरंतर बदलती तकनीकों, आधुनिक उपचार पद्धतियों और नवीनतम शोध से चिकित्सकों का अपडेट रहना समय की आवश्यकता है। ऐसे आयोजनों से विशेषज्ञों के अनुभवों का लाभ युवा चिकित्सकों एवं रेजिडेंट्स तक पहुंचता है तथा मरीजों को बेहतर एवं आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में चिकित्सकों की क्षमता और दक्षता को और मजबूती मिलती है। उन्होंने आयोजन के लिए गौतम बुद्ध चिकित्सा महाविद्यालय एवं डॉ. के.के.बी.एम. सुभारती अस्पताल की पूरी टीम को शुभकामनाएं दीं।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रो. डॉ. आर.सी. गुप्ता, प्राचार्य, एल.एल.आर.एम. मेडिकल कॉलेज, मेरठ उपस्थित रहे। उन्होंने सुभारती ऑप्थाकॉन-2026 के वैज्ञानिक स्वरूप की सराहना करते हुए कहा कि चिकित्सा शिक्षा में सीएमई एवं वैज्ञानिक सम्मेलनों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे मंच चिकित्सकों और चिकित्सा शिक्षकों को अपने क्लीनिकल अनुभव, शोध कार्य एवं नवीनतम चिकित्सा ज्ञान को साझा करने का अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने विशेष रूप से युवा चिकित्सकों और पोस्टग्रेजुएट रेजिडेंट्स की सक्रिय भागीदारी को चिकित्सा शिक्षा के भविष्य के लिए सकारात्मक कदम बताया और कहा कि इस प्रकार के अकादमिक आयोजन ज्ञान के निरंतर आदान-प्रदान के साथ-साथ चिकित्सा सेवाओं में उत्कृष्टता की भावना को भी प्रोत्साहित करते हैं।

कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण के रूप में देश के विख्यात नेत्र रोग विशेषज्ञ एवं पद्मश्री प्रो. डॉ. एस. नटराजन ने डॉ. के.के. भटनागर ऑरेशन प्रस्तुत किया। उन्होंने “द फाइन आर्ट एंड साइंस ऑफ मैनेजिंग ऑप्थैल्मिक ट्रॉमा—लेसन्स फ्रॉम 65,000 सर्जरीज” विषय पर अपने छह दशकों से अधिक के व्यापक सर्जिकल अनुभवों को चिकित्सकों के साथ साझा किया। प्रो. डॉ. एस. नटराजन रेटिना हॉल ऑफ फेम के चार्टर इंडक्टी, ऑल इंडिया ऑप्थेल्मोलॉजिकल सोसाइटी के पूर्व अध्यक्ष, इंडियन जर्नल ऑफ ऑप्थेल्मोलॉजी के एडिटर-इन-चीफ तथा एशिया-पैसिफिक ऑप्थेल्मिक ट्रॉमा सोसाइटी के तत्कालीन पूर्व अध्यक्ष सहित अनेक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय दायित्व निभा चुके हैं।

कार्यक्रम का शुभारंभ इनॉगरेशन एवं लैम्प लाइटिंग के साथ हुआ। सीएमई के प्रथम वैज्ञानिक सत्र में कम्पेटिटिव पीजी फ्री पेपर सेशन आयोजित किया गया, जिसमें नेत्र रोग विशेषज्ञता के रेजिडेंट्स ने अपने शोध एवं मौलिक कार्य प्रस्तुत किए। इस सत्र के कन्वीनर प्रो. डॉ. यूसुफ रिजवी तथा मॉडरेटर डॉ. मनीषा शर्मा रहीं। प्रस्तुतियों के मूल्यांकन के लिए डॉ. अंकित शर्मा, डॉ. ललित गुप्ता एवं डॉ. शिवम गुप्ता निर्णायक मंडल में शामिल रहे।

इसके पश्चात आयोजित लेक्चर सत्र में नेत्र चिकित्सा से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञ वक्ताओं ने अपने विचार रखे। सत्र की अध्यक्षता प्रो. डॉ. शांति पांडे, प्रो. डॉ. नीति गुप्ता, प्रो. डॉ. तरन्नुम शकील, एवं प्रो. डॉ. संतोष सहित विशेषज्ञों ने की। वैज्ञानिक सत्र में प्रो. डॉ. वाई. रिजवी, प्रो. डॉ. संजीव के. मित्तल, डॉ. सौरभ लूथरा, डॉ. नीति गुप्ता एवं प्रो. डॉ. सौरभ वार्ष्णेय ने अपने व्याख्यान एवं विशेषज्ञ अनुभव साझा किए।

डॉ. के.के. भटनागर ऑरेशन के दौरान ऑक्यूलर ट्रॉमा पर विशेष वैज्ञानिक चर्चा हुई। इस सत्र की अध्यक्षता प्रो. डॉ. वाई. रिजवी, प्रो. डॉ. हर्ष बहादुर, प्रो. डॉ. संजीव के. मित्तल एवं डॉ. सौरभ लूथरा ने की, जबकि वैज्ञानिक चर्चा के संचालन में डॉ. मनीषा शर्मा, डॉ. ज्योति शर्मा, डॉ. तृप्ति चौधरी एवं डॉ. हिमानी पाल की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

सीएमई के दौरान पोस्टर इवैल्यूएशन एवं स्किल लैब सेशन भी आयोजित किया गया। वैज्ञानिक समिति की चेयरपर्सन डॉ. मनीषा शर्मा के संयोजन में पोस्टर प्रस्तुतियों का मूल्यांकन प्रो. डॉ. सुनीता जगताप, डॉ. मनु भारद्वाज एवं डॉ. अंकित शर्मा ने किया। कार्यक्रम में ऑक्यूलर ट्रॉमा को फ्री पेपर एवं पोस्टर प्रतियोगिता का मुख्य विषय बनाया गया था, जिससे युवा चिकित्सकों को नेत्र संबंधी चोटों के आधुनिक प्रबंधन एवं अपने शोध कार्यों को वैज्ञानिक मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर मिला।

द्वितीय वैज्ञानिक सत्र में प्रो. डॉ. संजीव गर्ग, प्रो. डॉ. प्राची शुक्ला, प्रो. डॉ. तरन्नुम शकील, प्रो. डॉ. सुमन, डॉ. शिवम गुप्ता, डॉ. शुभम शर्मा, डॉ. अंकित शर्मा, डॉ. विशाल एच. शर्मा, डॉ. रोहन मेहरा, डॉ. प्रियंका गुसाईं, डॉ. शिशिर अग्रवाल, डॉ. अनुज शर्मा एवं मेजर डॉ. सुजाता उपाध्याय सहित विशेषज्ञों ने विभिन्न विषयों पर वैज्ञानिक विचार-विमर्श किया। सत्र के संचालन में डॉ. ज्योति शर्मा, डॉ. मनीषा शर्मा एवं डॉ. त्रिप्ती चौधरी ने अहम भूमिका निभाई।

कार्यक्रम के चीफ एडवाइजर डॉ. राजेश तिवारी ने कहा कि आंख मानव शरीर के सबसे संवेदनशील एवं महत्वपूर्ण अंगों में से एक है और आंखों की चोटों के मामलों में समय पर सही निर्णय, विशेषज्ञ उपचार तथा आधुनिक सर्जिकल तकनीकों का उपयोग मरीज की दृष्टि बचाने में निर्णायक भूमिका निभाता है।

ऑर्गनाइजिंग चेयरमैन प्रो. डॉ. यूसुफ रिजवी ने कहा कि ऐसे सीएमई चिकित्सकों को नए शोध, नवीनतम उपचार पद्धतियों एवं वास्तविक क्लीनिकल अनुभवों से जोड़ने के साथ-साथ युवा चिकित्सकों को अपने शोध कार्य प्रस्तुत करने और वरिष्ठ विशेषज्ञों से सीधे सीखने का अवसर प्रदान करते हैं।

कार्यक्रम में कुलपति प्रो. डॉ. देश दीपक, प्रधानाचार्य प्रो. डॉ. अनिल के. मेहता, उप प्रधानाचार्य प्रो. डॉ. रूपा हंसपाल एवं एच.एम.सी. डॉ. अनिल मोंगिया का महत्वपूर्ण मार्गदर्श

न रहा। इस कार्यक्रम में डायरेक्टर बीहाइव श्री अमीत जोशी व श्रीमति अवनी कमल भी मौजूद रहे।

कार्यक्रम के आयोजन में डॉ. लोकेश त्यागी, डॉ. प्रशान्त कुमार भटनागर एवं रितेश श्रीवास्तव शामिल रहे। चेयरमैन फाइनेंस डॉ. एल.एम. सुन्दरीयाल तथा चेयरपर्सन साइंटिफिक कमेटी, डॉ. मनीषा शर्मा ने सीएमई के सफल आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। रिसेप्शन एवं रजिस्ट्रेशन कमेटी की चेयरपर्सन डॉ. त्रिप्ती चौधरी के साथ डॉ. क्राति श्रीवास्तव, डॉ. सरजना सिंह, डॉ. आकांक्षा व्यास, सविता पेटवाल, पूजा नेगी, लीला जोशी, प्रीति, अंकित तिवारी, पंकज, सागर यादव, गुंजेश ओझा ने व्यवस्थाओं को संभाला।

कार्यक्रम के अंत में वैलेडिक्टरी एवं अवार्ड सेशन आयोजित किया गया, जिसमें वैज्ञानिक प्रस्तुतियों एवं प्रतियोगितात्मक सत्रों में प्रतिभाग करने वाले युवा चिकित्सकों के प्रयासों को प्रोत्साहित किया गया।

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