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उत्तराखंड

देहरादून में मियावाकी अर्बन फॉरेस्ट्री के तीन वर्ष: 90% से अधिक सर्वाइवल रेट

Aarti Verma
Last updated: 2026/08/20 at 4:08 PM
Aarti Verma
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4 Min Read
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देहरादून में मियावाकी अर्बन फॉरेस्ट्री के तीन वर्ष: 90% से अधिक सर्वाइवल रेट

देहरादून, तीन वर्ष पूर्व, 20 अगस्त 2023 को देहरादून के वसंत विहार, पंडितवाड़ी मुख्य मार्ग पर मेजर विवेक गुप्ता चौक के निकट जापानी मियावाकी तकनीक पर आधारित अर्बन फॉरेस्ट्री के एक पायलट एक्सपेरिमेंट की शुरुआत की गई थी। इस पहल के तहत स्थानीय एवं क्षेत्र के अनुकूल प्रजातियों के 300 से अधिक पौधे लगाए गए थे।

अब इस पौधरोपण को तीन वर्ष पूरे हो चुके हैं और 90% से अधिक पौधे जीवित हैं, जो शहर में समुदाय के सहयोग से अर्बन फॉरेस्ट्री की संभावनाओं को प्रदर्शित करता है।

यह पौधरोपण उत्तराखंड वन विभाग के रिसर्च विंग, वसंत विहार दून वैली ऑफिसर्स कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी, एसडीसी फाउंडेशन और एसजीआई फाउंडेशन के सहयोग से एक संयुक्त पहल के रूप में किया गया था। लगाए गए पौधों में अमलतास, नीम, भीमल, तेजपत्ता, सहजन, पारिजात, कचनार सहित अन्य स्थानीय प्रजातियां शामिल थीं।

वर्ष 2023 में इस पहल की परिकल्पना अर्बन फॉरेस्ट के एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में की गई थी। एसडीसी फाउंडेशन और एसजीआई फाउंडेशन ने अधिकतम पौधों के जीवित रहने को सुनिश्चित करने के लिए तीन वर्षों तक पौधरोपण स्थल के रखरखाव की जिम्मेदारी संभाली। तीन वर्ष बाद 90% से अधिक पौधों का जीवित रहना अर्बन फॉरेस्ट्री प्रयोग का उत्साहजनक परिणाम है।

इस पौधरोपण की प्रेरणा उत्तराखंड में किए गए सफल मियावाकी कार्यों से मिली, विशेष रूप से कालसी में वरिष्ठ आई एफ एस अधिकारी संजीव चतुर्वेदी और उनकी टीम द्वारा विकसित मॉडल से।

तीसरी वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में संजीव चतुर्वेदी ने कहा कि मियावाकी तकनीक को केवल पेड़ लगाने की एक पद्धति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के पुनर्स्थापन और सीमित शहरी क्षेत्रों में जैव विविधता बढ़ाने के प्रभावी माध्यम के रूप में समझा जाना चाहिए।

संजीव चतुर्वेदी ने स्थानीय प्रजातियों के चयन, मिट्टी की उचित तैयारी, उपयुक्त पौधरोपण घनत्व और नियमित रखरखाव के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ती गर्मी, विशेषकर गर्मियों के दौरान शहरी केंद्रों में बढ़ते तापमान को नियंत्रित करने के लिए ऐसे स्थानीय प्रयासों को व्यापक स्तर पर बढ़ाना आवश्यक है।

एसडीसी फाउंडेशन के अनूप नौटियाल ने कहा कि तीन वर्ष पूरे होना इस शहरी वानिकी पहल के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि यह प्रयोग दर्शाता है कि जब संस्थाएं, समुदाय और नागरिक समाज संगठन मिलकर कार्य करते हैं, तो शहर की सीमाओं के भीतर भी सार्थक हरित क्षेत्र विकसित किए जा सकते हैं।

एसजीआई फाउंडेशन की प्रेरणा रतूड़ी ने कहा कि यह पहल शहरी हरित क्षेत्रों के निर्माण और संरक्षण में निरंतर सामुदायिक भागीदारी के महत्व को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयासों को केवल अलग-अलग पौधरोपण अभियानों तक सीमित रखने के बजाय दीर्घकालिक और समुदाय-आधारित पर्यावरणीय कार्यक्रमों के रूप में विकसित करने की आवश्यकता है।

एसडीसी के मियावाकी प्रोजेक्ट लीड प्यारे लाल ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में यह पौधरोपण स्थल काफी विकसित हुआ है और अब यह एक स्थापित शहरी हरित क्षेत्र के रूप में दिखाई देता है। उन्होंने 90% से अधिक पौधों के जीवित रहने का श्रेय नियमित रखरखाव, निगरानी और समुदाय के सहयोग को दिया।

तीसरी वर्षगांठ के कार्यक्रम का संचालन एसडीसी फाउंडेशन के दिनेश सेमवाल ने किया। कार्यक्रम में वन विभाग की सांख्यिकी अधिकारी आकृति, वसंत विहार के पर्यावरणविद् राकेश कपूर, हिमोथान के अक्षय कुकरेती, वन विभाग के नरेंद्र चौहान, तथा एसडीसी फाउंडेशन से प्रवीण उप्रेती, सुनीत वर्मा, कनिष्क दास और सुभाष एवं एसजीआई फाउंडेशन से उत्कर्ष राणा उपस्थित रहे।

 

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Aarti Verma August 20, 2026 August 20, 2026
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