बाबा केदार की रूप छड़ी नांदेड़ ले जाने पर विवाद, बीकेटीसी अध्यक्ष ने सीईओ से मांगा जवाब
रुद्रप्रयाग। बाबा केदार की ‘रूप छड़ी’ को नांदेड़ (महाराष्ट्र) ले जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने इसे परंपरा का उल्लंघन बताते हुए समिति के मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) विजय थपलियाल से स्पष्टीकरण मांगा है। बताया जा रहा है कि रूप छड़ी को बोर्ड की स्वीकृति के बिना ही नांदेड़ में आयोजित रावल के पट्टाभिषेक रजत महोत्सव में ले जाया गया था।
मंदिर समिति के अनुसार हाल ही में समिति के कुछ कर्मचारी बिना अनुमति बाबा केदार की रूप छड़ी और अन्य कीमती आभूषण नांदेड़ लेकर गए थे। इस कार्यक्रम में केदारनाथ धाम के रावल भीमाशंकर लिंग ने परंपरा के विपरीत अपना उत्तराधिकारी भी घोषित कर दिया। इस घटना को गंभीर मानते हुए मंदिर समिति ने उनसे दस दिन के भीतर स्पष्टीकरण मांगा था। तय समय में जवाब न मिलने पर सीईओ की ओर से ऊखीमठ स्थित उनके निवास पर नोटिस चस्पा कराया गया, हालांकि रावल ने नोटिस मिलने से इनकार किया है।
परंपरा का सवाल
मंदिर समिति का कहना है कि परंपरा के अनुसार बाबा केदार की ‘रूप छड़ी’ का उपयोग केवल विशेष धार्मिक अनुष्ठानों में ही किया जाता है। वर्ष 2000 में तत्कालीन रावल ने रूप छड़ी और अन्य आभूषण दक्षिण भारत ले जाने के लिए आवेदन किया था, लेकिन अधिकारियों की प्रतिकूल रिपोर्ट के आधार पर मंदिर समिति ने अनुमति नहीं दी थी।
हालांकि वर्ष 2016 में इसी तरह के एक मामले में अनुमति दिए जाने का आदेश जारी हुआ था, जिसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को नहीं होने की बात अभिलेखों में दर्ज है। अब उसी आदेश के आधार पर दोबारा अनुमति दिए जाने को मंदिर समिति ने मंदिर की परंपरा और गरिमा के विपरीत बताया है।
उत्तराधिकारी घोषित करने पर भी विवाद
बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने नांदेड़ में रावल भीमाशंकर लिंग द्वारा अपने उत्तराधिकारी का पट्टाभिषेक किए जाने के मामले को गंभीर और संवेदनशील बताया है। उन्होंने कहा कि रावल ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अपने उत्तराधिकारी की घोषणा कर दी, जबकि इसकी पूर्व सूचना मंदिर समिति को नहीं दी गई।
सीईओ की ओर से भेजे गए नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि रावल की नियुक्ति का अधिकार केवल मंदिर समिति के पास है। ऐसे में नांदेड़ में किया गया पट्टाभिषेक नियमावली का उल्लंघन माना जा रहा है।
पहले भी लग चुके हैं आरोप
रावल भीमाशंकर लिंग पर पहले भी सेवा शर्तों के उल्लंघन के आरोप लगते रहे हैं। नियुक्ति की शर्तों के अनुसार रावल को मिलने वाले दान की पूरी राशि मंदिर समिति के कोष में जमा करनी होती है, लेकिन उन पर ‘कोठा भवन’ के नाम पर एकत्र धनराशि निजी तौर पर रखने के आरोप लगे हैं। इसके अलावा बिना अनुमति देशभर में यात्राएं करना और केदारनाथ धाम तथा ऊखीमठ में नियमित रूप से निवास न करना भी अनुशासनहीनता के रूप में सामने आया है।


