हरेला पर प्रकृति संरक्षण का संदेश, लेखक गांव में शुरू होगी ‘प्रकृति की पाठशाला’
स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय में महा-वृक्षारोपण, पर्यावरण संरक्षण का लिया संकल्प; डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ बोले— प्रकृति से जुड़ाव ही जीवन की पूर्णता है
डोईवाला– उत्तराखंड के लोकपर्व हरेला पर स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय एवं हिमालयन आयुर्वेदिक एंड मेडिकल कॉलेज में महा-वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान लेखक गांव में ‘प्रकृति की पाठशाला’ शुरू करने की घोषणा की गई और पर्यावरण संरक्षण का सामूहिक संकल्प लिया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। विश्वविद्यालय परिसर में छायादार, फलदार एवं औषधीय प्रजातियों के पौधों का रोपण किया गया। वक्ताओं ने हरेला को प्रकृति संरक्षण का जनअभियान बताते हुए पौधारोपण के साथ उनके संरक्षण का भी संकल्प दिलाया।
पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने कहा कि हरेला केवल पौधे लगाने का नहीं, बल्कि उनके संरक्षण का भी पर्व है। प्रकृति से जुड़ाव ही जीवन की पूर्णता है।

प्रख्यात पर्यावरणविद् सच्चिदानंद भारती ने कहा कि लेखक गांव की ‘प्रकृति की पाठशाला’ नई पीढ़ी को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनाने की अभिनव पहल होगी।
स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय की उपाध्यक्ष एवं लेखक गांव की निदेशक विदुषी निशंक ने कहा कि हरेला हमारी सांस्कृतिक विरासत और प्रकृति के प्रति आस्था का प्रतीक है। यह पर्व हमें अपनी जड़ों से जुड़े रहने की प्रेरणा देता है।
स्पर्श गंगा अभियान की राष्ट्रीय संयोजिका एवं स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय की कोषाध्यक्ष डॉ. आरुषि निशंक ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाना समय की आवश्यकता है। युवाओं की सक्रिय भागीदारी से ही हरित भविष्य सुरक्षित होगा।
विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डॉ. प्रदीप भारद्वाज ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम में जीवनवाला ग्राम पंचायत के प्रधान गुरजीत सिंह लाड़ी, प्रति कुलपति डॉ. राकेश सुंदरियाल, सचिव बालकृष्ण चमोली, प्रधानाचार्य डॉ. जी.एस. इंदौरिया, संयुक्त निदेशक डॉ. प्रदीप कोठियाल, प्रशासनिक अधिकारी डॉ. निशांत राय जैन, विश्वविद्यालय के शिक्षकगण, कर्मचारी, जनप्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।


