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Bebak News > Blog > उत्तराखंड > गुणवत्ता आधारित संस्कृति को बढ़ावा देना जरूरी – मुख्यमंत्री
उत्तराखंड

गुणवत्ता आधारित संस्कृति को बढ़ावा देना जरूरी – मुख्यमंत्री

Aarti Verma
Last updated: 2026/01/06 at 10:34 AM
Aarti Verma
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6 Min Read
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भारतीय मानक ब्यूरो के 79वें स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में किया प्रतिभाग

गुणवत्ता आधारित संस्कृति को बढ़ावा देना जरूरी – मुख्यमंत्री

देहरादून : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को भारतीय मानक ब्यूरो के 79वें स्थापना दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय मानक ब्यूरो ने बीते आठ दशकों में गुणवत्ता, विश्वसनीयता और उपभोक्ता संरक्षण की दिशा में उल्लेखनीय कार्य कर गुणवत्ता ही पहचान के मंत्र को साकार किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1947 में भारतीय मानक संस्था के रूप में शुरू हुई यह यात्रा आज देश की औद्योगिक, वैज्ञानिक और आर्थिक प्रगति की मजबूत आधारशिला के रूप में स्थापित हो चुकी है। उन्होंने कहा कि बीआईएस द्वारा मानकीकरण, प्रमाणीकरण और गुणवत्ता परीक्षण के माध्यम से न केवल उद्योगों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के योग्य बनाया गया है, बल्कि उपभोक्ताओं के जीवन में भरोसे और सुरक्षा की भावना को भी सुदृढ़ किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज मानकीकरण का क्षेत्र केवल उद्योग जगत तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि कृषि, स्वास्थ्य, सड़क सुरक्षा, ऊर्जा, जल संरक्षण, आपदा प्रबंधन एवं डिजिटल सेवाओं तक विस्तृत हो चुका है। उन्होंने कहा कि भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा डिजिटल सुरक्षा, मेडिकल डिवाइस, ड्रोन, इलेक्ट्रिक वाहन, रिसाइकिल सामग्री एवं हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में समयानुकूल मानक तय कर भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय मानक ब्यूरो सतत विकास के लक्ष्य के अनुरूप इकोलॉजी और इकॉनमी के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में सराहनीय योगदान दे रहा है। राज्य में बीआईएस द्वारा लोक निर्माण विभाग, आपदा प्रबंधन, एमडीडीए, यूपीसीएल सहित विभिन्न विभागों के साथ समन्वय करते हुए मानकीकरण संबंधी जागरूकता और सहयोगात्मक कार्य किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया जैसे अभियान देश की आर्थिक और तकनीकी प्रगति के आधार स्तंभ बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय उत्पाद विश्व में गुणवत्ता का मानदंड बनें यह प्रधानमंत्री का स्पष्ट दृष्टिकोण है और इस लक्ष्य की प्राप्ति में बीआईएस की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार भी अपने स्थानीय उत्पादों हस्तशिल्प, जैविक कृषि उत्पाद, औषधीय जड़ी-बूटियाँ एवं स्थानीय खाद्य उत्पाद के लिए उच्च गुणवत्ता मानक स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि ‘‘हाउस ऑफ हिमालयाज’’ ब्रांड राज्य के पारंपरिक उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है।

उन्होंने कहा कि गुणवत्ता को केवल मानक नहीं बल्कि आदत बनाना आवश्यक है, ताकि गुणवत्ता आधारित संस्कृति एक जन आंदोलन के रूप में विकसित हो सके। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारतीय मानक ब्यूरो वन नेशन, वन स्टैंडर्ड की नीति के तहत देश को वैश्विक मानकों की प्रतिस्पर्धा में अग्रणी बनाएगा और वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प में अपनी अहम भूमिका निभाता रहेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में वैज्ञानिक सोच और तकनीकी नवाचार को सुदृढ़ करने के लिए सरकार ने कई ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में पहली बार विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति 2025 लागू की गई है। राज्य के सभी 13 जनपदों के 95 ब्लॉकों में लगभग 180 विज्ञान, तकनीक इंज्ीनियरिंग एवं गणित आधारित प्रयोगशालाएँ स्थापित की गई हैं।

सभी जिलों में साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रीमियर लीग प्रारंभ की गई है, जिससे सैकड़ों छात्र लाभान्वित हो रहे हैं। प्रत्येक जनपद में एक-एक ‘लैब-ऑन-व्हील्स’ संचालित की जा रही है। विभिन्न विश्वविद्यालयों व केन्द्रों में 60 पेटेंट सूचना केंद्र स्थापित किए गए हैं। सीमांत क्षेत्रों में विज्ञान आधारित विकास के लिए ‘सीमांत क्षेत्र विकास परिषद’ का गठन किया गया है।

साइंस महोत्सवों का आयोजन अब पर्वतीय जनपदों तक विस्तारित किया गया है, इस वर्ष यह महोत्सव रुद्रप्रयाग में हुआ। वैज्ञानिक नवाचार को बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक जनपद में विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार केन्द्रों की स्थापना हेतु बजट आवंटित किया गया है। राज्य में शीघ्र विज्ञान व नवाचार आधारित प्रसारण प्रारंभ किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देहरादून में बनने वाली देश की पाँचवीं साइंस सिटी के निर्माण कार्य को उल्लेखनीय गति मिली है। भारत सरकार और राज्य सरकार के संयुक्त सहयोग से 175 करोड़ रुपये की लागत से यह परियोजना आकार ले रही है। महिला प्रौद्योगिकी केन्द्रों की स्थापना भी प्रारंभ की जा चुकी है।

राज्य में केन्द्रीय संस्थानों से विज्ञान व नवाचार संवाद को नई गति दी गई है। सिलक्यारा के अभियान में अपनाए गए विज्ञान-प्रौद्योगिकी आधारित रेस्क्यू मॉडल को अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिली है और इसी पर आधारित विश्व आपदा प्रबंधन सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। आज राज्य के हर कोने विज्ञान और प्रौद्योगिकी से जोड़ा गया है।

इस अवसर पर विधायक खजान दास, उमेश शर्मा काऊ, सविता कपूर, निदेशक भारतीय मानक ब्यूरो सौरभ तिवारी, महानिदेशक यू-कॉस्ट प्रो. दुर्गेश पंत, ब्रिगेडियर के.जी बहल (सेनि), उद्योग एवं व्यापार संघ के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

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Aarti Verma January 6, 2026 January 6, 2026
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