By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Bebak NewsBebak News
  • उत्तराखंड
  • पॉलिटिक्स
  • आस्था
  • क्राइम
  • देश-विदेश
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • सामाजिक
  • वीडियो
  • Contact Us
Reading: उत्तराखण्ड के विकास का रास्ता इकोलॉजी और इकोनॉमी के संतुलन से होकर निकलेगा – मुख्यमंत्री
Share
Sign In
Notification Show More
Aa
Bebak NewsBebak News
Aa
  • उत्तराखंड
  • आस्था
Search
  • उत्तराखंड
  • पॉलिटिक्स
  • आस्था
  • क्राइम
  • देश-विदेश
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • सामाजिक
  • वीडियो
  • Contact Us
Have an existing account? Sign In
Follow US
  • Advertise
© 2024 Bebak News. All Rights Reserved. | Developed By:Tech Yard Labs
Bebak News > Blog > उत्तराखंड > उत्तराखण्ड के विकास का रास्ता इकोलॉजी और इकोनॉमी के संतुलन से होकर निकलेगा – मुख्यमंत्री
उत्तराखंड

उत्तराखण्ड के विकास का रास्ता इकोलॉजी और इकोनॉमी के संतुलन से होकर निकलेगा – मुख्यमंत्री

Aarti Verma
Last updated: 2026/09/07 at 1:14 PM
Aarti Verma
Share
8 Min Read
SHARE

हिमालय दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित ‘हिमालयो नाम नगाधिराजः’ कार्यक्रम में शामिल हुए मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री की घोषणा-हर वर्ष प्रदान किया जाएगा ‘हिमालय विभूति सम्मान’

हिमालय परिषद् में मूलभूत सुविधाओं और संसाधनों में वृद्धि के लिए ₹1 करोड़ की धनराशि की घोषणा

उत्तराखण्ड के विकास का रास्ता इकोलॉजी और इकोनॉमी के संतुलन से होकर निकलेगा – मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को वीर माधो सिंह भण्डारी उत्तराखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, देहरादून में हिमालय दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित ‘हिमालयो नाम नगाधिराजः’ कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर हिमालय परिषद् में मूलभूत सुविधाओं और संसाधनों में वृद्धि के लिए ₹1 करोड़ की धनराशि देने की घोषणा की।

उन्होंने यह भी घोषणा की कि हिमालय के संरक्षण, संवर्धन एवं सतत विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं हिमालयी क्षेत्रों के लिए समर्पित विशिष्ट व्यक्तित्वों को ‘हिमालय विभूति सम्मान’ प्रदान किया जाएगा। यह सम्मान प्रत्येक वर्ष हिमालय दिवस के अवसर पर प्रदान किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से संबंधित पांच पोस्टरों का विमोचन किया। इनमें 7वें देहरादून इंटरनेशनल साइंस एंड टेक्नोलॉजी फेस्टिवल, साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रीमियर लीग, सीमांत बाल विज्ञान कांग्रेस, ज्ञानोत्कर्ष तथा 21वीं उत्तराखण्ड राज्य साइंस कॉन्फ्रेंस के पोस्टर शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने विज्ञान के लोकप्रियकरण पर केंद्रित पत्रिका ‘विज्ञान संप्रेषण’ के पांचवें वार्षिकांक का भी विमोचन किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालय हमारे लिए केवल एक पर्वत श्रृंखला नहीं, बल्कि हमारी पहचान, संस्कृति और अस्तित्व का आधार है। आदि काल से हिमालय हमारे ऋषियों, मुनियों, साधकों और विचारकों की तपोभूमि रही है। गंगा और यमुना सहित अनेक जीवनदायिनी नदियों का उद्गम हिमालय से होता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग आज पूरी दुनिया के सामने बड़ी चुनौती हैं और इनका प्रभाव हिमालयी क्षेत्रों में भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। ग्लेशियरों पर बढ़ता दबाव, पारंपरिक जल स्रोतों पर संकट तथा अतिवृष्टि, भूस्खलन, वनाग्नि और अचानक आने वाली बाढ़ जैसी घटनाएं लगातार नई चुनौतियां खड़ी कर रही हैं। हिमालय की संवेदनशीलता का सम्मान करते हुए विकास कार्यों में विज्ञान, तकनीक, सुरक्षा और प्रकृति के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ना आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन किसी राज्य या देश की सीमाओं को देखकर अपना प्रभाव नहीं डालता। पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने में बहुत कम योगदान देने वाले हिमालयी क्षेत्रों को भी इसका बड़ा मूल्य चुकाना पड़ सकता है। इसलिए जलवायु परिवर्तन की जिम्मेदारी और उसके समाधान के प्रयास साझा होने चाहिए।

हिमालयी राज्यों की इस चिंता और आवाज को राष्ट्रीय एवं वैश्विक मंचों तक और मजबूती से पहुंचाने की आवश्यकता है। हिमालय के ग्लेशियर और जल स्रोत प्रभावित होने का असर नदियों, कृषि, पेयजल और करोड़ों लोगों के जीवन पर पड़ता है। इसलिए हिमालय संरक्षण केवल पर्यावरण का विषय नहीं, बल्कि हमारे भविष्य से जुड़ा विषय है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नई पीढ़ी पर्यावरण को लेकर जागरूक है। आज युवा हिमालय, नदियों, जंगलों, स्वच्छ हवा और पानी जैसे विषयों पर गंभीरता से सोच रहे हैं। आने वाली पीढ़ियां हमसे केवल बड़ी इमारतों और चौड़ी सड़कों का हिसाब नहीं मांगेंगी, बल्कि स्वच्छ हवा, स्वच्छ पानी, नदियों और जंगलों का भी हिसाब मांगेंगी। इसलिए हमें आज ही तय करना होगा कि हम आने वाली पीढ़ियों को कैसा उत्तराखण्ड सौंपकर जाना चाहते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क, बिजली, अच्छी शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और रोजगार की आवश्यकता है, लेकिन उत्तराखण्ड के विकास का मॉडल राज्य की अपनी भौगोलिक परिस्थितियों और आवश्यकताओं के अनुरूप होना चाहिए। उत्तराखण्ड के विकास का रास्ता इकोलॉजी और इकोनॉमी के संतुलन से होकर ही निकलेगा। हमें ऐसा विकास चाहिए जिसमें सड़क भी बने और जंगल भी बचें, रोजगार भी बढ़े और नदियां भी निर्मल रहें, पर्यटन भी बढ़े और पहाड़ों की धारण क्षमता का भी ध्यान रखा जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया के सामने पर्यावरण संरक्षण का प्रभावी मंत्र ‘मिशन लाइफ’ अर्थात ‘लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट’ दिया है। पर्यावरण की रक्षा केवल सरकारों की नीतियों से नहीं होगी, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जीवनशैली में भी बदलाव लाना होगा। पानी और बिजली की बचत, प्लास्टिक का प्रयोग कम करना, स्वच्छता रखना, स्थानीय उत्पादों को अपनाना और प्रकृति के प्रति जिम्मेदार व्यवहार जैसे छोटे-छोटे प्रयास मिलकर बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘नमामि गंगे’, ‘नेशनल मिशन फॉर सस्टेनिंग द हिमालयन इकोसिस्टम’ और ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ जैसे प्रयासों के माध्यम से हिमालयी क्षेत्रों के संरक्षण और सतत विकास को गति दी जा रही है।

राज्य सरकार भी उत्तराखण्ड को हिमालय संरक्षण की दिशा में मॉडल राज्य बनाने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। हमारा प्रयास है कि उत्तराखण्ड हिमालय संरक्षण के विषय में केवल अपनी चिंता व्यक्त करने वाला राज्य न रहे, बल्कि पूरे देश को दिशा और नेतृत्व देने वाला राज्य बने। इसके लिए पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान और तकनीक से जोड़कर हिमालयी क्षेत्रों की चुनौतियों के टिकाऊ समाधान तलाशने होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालय संरक्षण के लिए जनभागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य से 2 सितंबर के बुग्याल दिवस से 9 सितंबर के हिमालय दिवस तक पूरे सप्ताह को ‘हिमालय दिवस सप्ताह’ के रूप में मनाने की शुरुआत की गई है। हिमालय संरक्षण केवल सरकारी कार्यक्रमों और सेमिनारों तक सीमित न रहकर जन-जन का आंदोलन बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि बुग्याल हमारी जैव विविधता और जल स्रोतों के महत्वपूर्ण आधार हैं, जंगल हमारी हवा, पानी और मिट्टी के रक्षक हैं तथा नदियां हमारी सभ्यता की जीवनधारा हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालय संरक्षण को पहाड़ की समृद्धि से भी जोड़ना होगा। गांवों में रोजगार, स्थानीय उत्पादों को बाजार, मातृशक्ति का आर्थिक सशक्तिकरण, प्राकृतिक खेती और पर्यावरण अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा देकर पलायन को कम किया जा सकता है। हिमालय का संरक्षण और पहाड़ की समृद्धि एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं। हमारे जंगल, बुग्याल, जैव विविधता, नदियां, पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय उत्पाद हमारी इकोलॉजिकल वेल्थ हैं और यही भविष्य में हमारी इकोनॉमिक स्ट्रेंथ भी बन सकते हैं।

इस अवसर पर विधायक किशोर उपाध्याय, हेस्को के संस्थापक एवं पद्म भूषण से सम्मानित डॉ. अनिल प्रकाश जोशी, वीर माधो सिंह भण्डारी उत्तराखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. तृप्ता ठाकुर, महानिदेशक यू-कॉस्ट प्रो. दुर्गेश पंत, रजिस्ट्रार वीर माधो सिंह भण्डारी उत्तराखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय डॉ. राजेश उपाध्याय, संयुक्त निदेशक यू कॉस्ट डी.पी. उनियाल एवं अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

You Might Also Like

उत्तराखंड में मतदाता सूची को लेकर विशेष अभियान, 8 से 10 अक्टूबर तक बूथों पर लगेंगे कैंप

संस्कृत ग्रामों में सालभर नियमित रूप से आयोजित हों संस्कृत आधारित गतिविधियां – मुख्यमंत्री

PM मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे, सीएम धामी ने काशी विश्वनाथ मंदिर में की विशेष पूजा

देहरादून : अपराध घटित होने पर पुलिस की तय हो जवाबदेही – धस्माना

डीएम डॉ. आशीष चौहान व पालिकाध्यक्ष मीरा सकलानी ने किया शरदोत्सव-2026 का शुभारंभ

Aarti Verma September 7, 2026 September 7, 2026
Share This Article
Facebook Twitter Whatsapp Whatsapp Telegram Copy Link Print
Share
Previous Article विधिक सेवा शिविर में शिक्षा, स्वास्थ्य और जनकल्याण की योजनाओं का लाभ, 3500 से अधिक लोग हुए शामिल
Next Article मुख्यमंत्री ने किया ‘मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना’ का शुभारंभ
Leave a comment Leave a comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Advt.

Latest News

उत्तराखंड में मतदाता सूची को लेकर विशेष अभियान, 8 से 10 अक्टूबर तक बूथों पर लगेंगे कैंप
उत्तराखंड October 7, 2026
संस्कृत ग्रामों में सालभर नियमित रूप से आयोजित हों संस्कृत आधारित गतिविधियां – मुख्यमंत्री
उत्तराखंड October 7, 2026
PM मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे, सीएम धामी ने काशी विश्वनाथ मंदिर में की विशेष पूजा
उत्तराखंड October 7, 2026
देहरादून : अपराध घटित होने पर पुलिस की तय हो जवाबदेही – धस्माना
उत्तराखंड October 7, 2026
डीएम डॉ. आशीष चौहान व पालिकाध्यक्ष मीरा सकलानी ने किया शरदोत्सव-2026 का शुभारंभ
उत्तराखंड October 6, 2026
Bebak NewsBebak News
Follow US
© 2024 Bebak News. All Rights Reserved. | Developed By:Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?